शुक्रवार, 16 मई 2014

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचनाएं


सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (1897-1961)

(21 फ़रवरी, 1896 ई., मेदनीपुर बंगाल; मृत्यु- 15 अक्टूबर, 1961, प्रयाग)
काव्य-संग्रह
• अनामिका (1923)
• परिमल (1930)
• गीतिका (1936)
• द्वितीय अनामिका (1938)
• तुलसीदास (प्रबन्ध काव्य, 1938)
• कुकुरमुत्ता (1941)
• अणिमा (1943)
• बेला (1943)
• नये पत्ते (1946)
• अर्चना (1950)
• आराधना (1953)
• गीत कुंज (1958)
• सांध्य काकली (1954 से 1958 तक की कविताएं, 1969)
• जन्मभूमि
• अपरा (1948)
• दो शरण
• रागविराग
लम्बी रचनाएँ
• राम की शक्ति पूजा (1936)
• सरोज स्मृति
• बादल राग (1920)
• तुलसीदास (प्रबन्ध काव्य, 1939)

कविताएं
• गर्म पकौड़ी / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• गहन है यह अंधकारा / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• गीत गाने दो मुझे / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• जूही की कली (1916)
• कुकुरमुत्ता (1941)
• तोड़ती पत्थर / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• दलित जन पर करो करुणा / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• बापू, तुम मुर्गी खाते यदि... / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• भारती वन्दना / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• भिक्षुक / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• मरा हूँ हज़ार मरण / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• वर दे वीणावादिनी वर दे ! / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• संध्या सुन्दरी / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
• स्नेह-निर्झर बह गया है / सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
उपन्यास
• अप्सरा (1931, वेश्या समस्या, कनक)
• अलका (1933)
• निरुपमा (1936, बेकारी की समस्या)
• प्रभावती (1936)
• चमेली (1941)
• चोटी की पकड़ (1944)
• काले कारनामे (1950)
• उच्छृंखलता
• दीवानों की हस्ती

निराला के चार अधूरे उपन्यास
• चमेली (1941)
• चोटी की पकड़ (1944)
• काले कारनामे (1950)
• इन्दुलेखा
कहानी-संग्रह
• शुकुल की बीवी (1941)
• सखी (1935, इसे 1945 में परिवर्तन के कुछ चतुरी चमार के नाम से प्रकाशित किया गया है।)
• लिली (1933)
• चतुरी चमार (1945)
• देवी (1948)
निबन्ध-संग्रह
• प्रबन्ध पदम् (1934, दो भाग)
• प्रबन्ध प्रतिमा (1940)
• चाबुक (1951)
• चयन (1957)
• संग्रह (1963)
• बाहर-भीतर
• हमारा समाज से दो बातें
• गांधीजी से बातचीत
• नेहरूजी

संस्मरण/कथात्मक रेखाचित्र
• कुल्ली भाट (1939)
• बिल्लेसुर बकरिहा (1941)

आलोचना
• रवींद्र कविता कानन (1928)
• पन्तजी और पल्लव (1949)
• 'हिन्दी-बंग्ला का तुलनात्मक व्याकरण' (1916) 'सरस्वती' में प्रकाशित

पुराण कथा
महाभारत

अनुवाद
• आनन्द मठ
• विश्व-विकर्ष
• कृष्ण कान्त का विल
• कपाल कुण्डला
• दुर्गेश नन्दिनी
• राज सिंह
• राज रानी
• देवी चौधरानी
• युगलंगुलिया
• चन्द्रशेखर
• रजनी
• श्री रामकृष्णा वचनामृत
• भारत में विवेकानन्द
• राजयोग।
सहायक ग्रन्थ
• क्रान्तिकारी कवि 'निराला' : बच्चन सिंह
• निराला की साहित्य-साधना : रामविलास शर्मा
• पत्रिकाओं का सम्पादन : समन्वय, 'मतवाला' मासिक पत्रिका सुधा।

जागा जागा संस्कार प्रबल
रे गया काम तत्क्षण वह जल
देखा वामा, वह न थी, अनल प्रमिता वह
इस ओर ज्ञान, उस ओर ज्ञान
हो गया भस्म वह प्रथम भान
छूटा जग का जो रहा ध्यान।
सरोज-स्मृति में लिखते हैं-
मुझ भाग्यहीन की तू सम्बल
युग वर्ष बाद जब हुयी विकल
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही।[4]

सन् 'परिमल' की भूमिका में लिखा है-
"मनुष्यों की मुक्ति की तरह कविता की भी मुक्ति होती है। मनुष्य की मुक्ति कर्म के बन्धन में छुटकारा पाना है और कविता मुक्त छन्दों के शासन से अलग हो जाना है। जिस तरह मुक्त मनुष्य कभी किसी तरह दूसरों के प्रतिकूल आचरण नहीं करता, उसके तमाम कार्य औरों को प्रसन्न करने के लिए होते हैं फिर भी स्वतंत्र। इसी तरह कविता का भी हाल है।"
• 'मेरे गीत और कला' शीर्षक निबन्ध में उन्होंने लिखा है—
"भावों की मुक्ति छन्दों की मुक्ति चाहती है। यहाँ भाषा, भाव और छन्द तीनों स्वछन्द हैं।"
'पंचवटी प्रसंग' गीति नाट्य, 'शेफ़लिका का पत्र', 'प्रेयसी', 'रेखा', 'सरोजस्मृति', 'राम की शक्तिपूजा' आदि उनकी श्रेष्ठतम रचनाएँ हैं। 'सरोजस्मृति' हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ शोक-गीत है तो 'राम की शक्तिपूजा' आदि उनकी श्रेष्ठतम रचनाएँ हैं।

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