बुधवार, 3 मई 2017

सिद्ध, जैन और नाथ साहित्य


सिद्धों की संख्या 84 है। इन्होंने बौद्ध धर्म के वज्रयान शाखा के प्रचार-प्रसार के लिए ग्रंथ लिखे।
प्रमुख सिद्ध एवं उनकी रचनाएँ
1.      सरहपा (769 ई.) : दोहाकोश, उपदेश गीति, द्वादशोपदेश, डाकिनीगुहयावज्रगीति, चर्यागीति, चित्तकोष अजव्रज गीति इनके कुल 32 ग्रंथ हैं।
2.      शबरपा (780 ई.) : चर्यापद, सितकुरु, वज्रयोगिनी, आराधन-विधि ।
3.      भूसुकपा (नवीं सदी)
4.      लुइपा  (830 ई., शबरपा के शिष्य) : अभिसमयविभगं, तत्वस्वभाव दोहाकोष, बुद्धोदय, भगवदअमभिसय, लुइपा-गीतिका ।
5.      विरूपा  (9वीं सदी)
6.      डोभ्भिपा (840 ई.) : योगचर्या, अक्षरद्विकोपदेश, डोंबि गीतिका, नाड़ीविंदुद्वारियोगचर्या । इनके कुल 21 ग्रंथ हैं ।
7.      दारिकपा (9वीं सदी) तथतादृष्टि, सप्तमसिद्धांत, ओड्डियान विनिर्गत-महागयह्यातत्वोपदेश
8.      गंडरिपा (9वीं सदी)
9.      कुकुरिपा (9वीं सदी)
10. कमरिपा (9वीं सदी)
11. कण्हपा (820 ई., जालन्धरपा के शिष्य) : योगरत्नमाला, असबधदृष्टि, वज्रगीति, दोहाकोष, बसंत तिलक, कान्हपाद गीतिका ।
12. गोरक्षपा (9वीं सदी)
13. तिलोपा (9वीं सदी)
14. शांतिपा : सुख दुख द्वयपरित्याग ।
15. तंतिपा : चतुर्योगभावना ।
16. विरूपा : अमृतसिद्ध, विरुपगीतिका, मार्गफलान्विताव वादक ।
17. भुसुकपा : बोधिचर्यावतार, शिक्षा-समुच्चय ।
18. वीणापा : वज्रडाकिनी निष्पन्नक्रम ।
19. कुकुरिपा : तत्वसुखभावनासारियोगभवनोपदेश, स्रवपरिच्छेदन ।
20. मीनपा : बाहयतरंबोधिचितबंधोपदेश ।
21. महीपा : वायुतत्व, दोहा गीतिका ।
22. कंबलपाद : असबध दृष्टि, कंबलगीतिका ।
23. नारोपा : नाडपंडित गीतिका, वज्रगीति,
24. गोरीपा : गोरखवाणी, पद-शिष्य दर्शन
25. आदिनाथ : विमुक्त मर्जरीगीत, हुंकारचित बिंदु भावना क्रम ।
26. तिलोपा : करुणा भावनाधिष्ठान, महा भद्रोपदेश ।

नाथ-साहित्य


सिद्धों की योग-साधना नारी भोग पर आधारित थी । इसकी प्रतिक्रिया में नाथ-धारा का आविर्भाव माना जाता है । यह हठयोग पर आधारित मत है । आगे चलकर यह साधना रहस्यवाद के रूप में प्रतिफलित हुई और नाथपंथ से ही भक्तिकाल के संतमत का विकास हुआ ।

आदिकाल की नाथ धारा के कवि और उनकी रचनाएँ


इस धारा के प्रवर्त्तक गोरखनाथ हैं । नाथों की संख्या नौ होने के कारण ये नवनाथ कहलाए। इन नवनाथों की रचनाएँ निम्नलिखित हैं :-
1.      गोरखनाथ : पंचमासा, आत्मबोध, विराटपुराण, नरवैबोध, ज्ञानतिलक, सप्तवार, गोरखगणेश संवाद, सबदी, योगेश्वरी, साखी, गोरखसार, गोरखवाणी, पद शिष्या दर्शन (इनके 14 काव्यग्रंथ मिलते हैं ) । डॉ पीताम्बर बड़थ्वाल ने गोरखबानी नाम से इनकी रचनाओं का एक संकलन संपादित किया है ।
2.      मत्स्येन्द्र या मच्छन्द्रनाथ : कौलज्ञान निर्णय, कुलानंदज्ञान-कारिका, अकुल-वीरतंत्र।
3.      जालंधर नाथ : विमुक्तमंजरी गीत, हुंकारचित बिंदु भावना क्रम ।
4.      चर्पटनाथ : चतुर्भवाभिवासन
5.      चौरंगीनाथ : प्राण संकली, वायुतत्वभावनोपदेश
6.      गोपीचंद : सबदी
7.      भर्तृनाथ (भरथरीनाथ) : वैराग्य शतक
8.      ज्वालेन्द्रनाथ : अप्राप्य
9.     गाहिणी नाथ : अप्राप्य

जैन धारा के कवि और उनकी रचनाएँ :
1.          स्वयम्भू (8वीं सदी) : 1.पउम चरिउ (रामकाव्य), 2. रिट्ठणेमि चरिउ, 3.पचाम चरिउ, 4. स्वयम्भू छंदपउम चरिउ (रामकाव्य) के कारण स्वयंभू को अपभ्रंश का वाल्मीकि कहा जाता है।
2.          पुष्पदंत (10वीं सदी) : महापुराण, णायकुमार चरिउ, जसहर चरिउ, कोश ग्रंथमहापुराण में इन्होंने कृष्णलीला का वर्णन किया है, इसलिए अपभ्रंश का व्यास कहा जाता है।
3.          धनपाल  (10वीं सदी) : भविस्यत्तकहा (एक बनिए की कहानी)
4.          देवसेन : श्रावकाचार (933 ई., डॉ. नगेन्द्र के अनुसार हिन्दी का पहला काव्यग्रंथ, सावधम्म दोहा), लघुनयचक्र, दरेशनसार
5.          वीर : जम्बूसामिचरिउ (11वीं शती)
6.          शालिभद्र सूरि : भरतेश्वर बाहुबलीरास (1184 ई., मुनि जिन विजय के अनुसार जैन साहित्य की रास परम्परा का प्रथम ग्रंथ)
7.          सोमप्रभ सूरि : कुमारपाल प्रतिबोध (1195 ई., चम्पूकाव्य)
8.          आसगु : चन्दनबालारास (1200 ई., खंडकाव्य, करुण रस की रचना)
9.          जिनधर्म सूरि : स्थूलीभद्ररास (1209 ई.)
10.     जिनदत्त सूरि : उपदेश रसायन रास
11.     जिन पदम सूरि : धूमि भद्दफाग (1243 ई. के लगभग)
12.     विनयचन्द्र सूरि : नेमिनाथ चतुष्पदिका  ((1243 ई. के लगभग))
13.     राजशेखर सूरि : नेमिनाथ फागु (12वीं-13वीं शती)
14.     जिनधर्म सूरि : स्थूलीभद्ररास (1309 ई.)
15.     सुमति गणि : नेमिनाथरास (1213 ई., नेमिनाथ-चरित)
16.     विजय सेन सूरि : रेवन्तगिरिरास (1231 ई., नेमिनाथ की प्रतिमा और रेवन्तगिरि तीर्थ का वर्णन)
17.     प्रज्ञातिलक : कचछूलिरास  (1306 ई.)
18.     हेमचंद्र सूरि (1085 ई.-1172 ई.)  : कुमारपाल चरित, हेमचंद्रशब्दानुशासन, देशी नाममाला, छन्दानुशासन, योगश।स्त्र
19.     मुनि राम सिंह  (11वीं शती) : पाहुड़ दोहा
20.     जोइन्दु  (6ठी शती) : परमात्म प्रकाश (मुक्तक काव्य), योगसार
21.     जिन पदम सूरि : धूमि भद्दफाग (1243 ई.)
22.     विनयचन्द्र सूरि : नेमिनाथ चतुष्पादिका
23.     राजशेखर सूरि : नेमिनाथ फागु (13वीं-13वीं सदी)
24.     जैनाचार्य मेरुतुंग : प्रबंध चिंतामणि (1304 ई.)
25.     धर्म सूरि : जम्बू स्वामी रास, स्थूलिभद्र रास (1200 के बाद)
26.     देवसेमणि : सुलोचना चरिउ
27.     मुनि कनका : करकंड चरिउ
28.     धवल : हरिवंश पुराण
29.     वरदत्त : बैरसामि चरिउ
30.     हरिभद्र सूरी : णाभिणाह चरिउ
31.     धाहिल : पउमसिरी चरिउ
32.     लक्खन : जिवदत्त चरिउ
33.     जल्ह कवि : बुद्धि रासो
34.     माधवदास चारण : राम रासो
35.     देल्हण : गद्य सुकुमाल रासो
36.     श्रीधर : रणमल छंद, पारीछत रायसा
37.     रोडा कवि : राउलवेल (10वीं शती)
38.     योगसार : सानयधम्म दोहा

39.     श्यधू : धन कुमार चरित

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