मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

1. '#कीर्तिलता' में किस राजा की कीर्ति गाई गई है?

उत्तर : कीर्ति सिंह की।

2. '#अभिनव जयदेव' किसका उपनाम था?

उत्तर : विद्यापति का

3. #कबीरदास के गुरु का नाम लिखें।

उत्तर : रामानंद

4. #बीजक किसकी रचना है?

उत्तर : धर्मदास

5. '#कबीर' शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर : महान, श्रेष्ठ

6. #सूर कृष्ण की भक्ति किस भाव से करते थे?

उत्तर : सख्य भाव

7. '#निसिदिन बरसत नैन हमारे' किनकी रचना है

उत्तर : सूरदास

8. '#कृष्ण गीतावली' किसकी कृति है?

उत्तर : तुलसीदास की

9. #तुलसीदास के गुरु का क्या नाम था?

उत्तर : नरहरी दास

10. #बिहारी लाल किस राजा के दरबारी कवि थे?

उत्तर : जय सिंह

11. #बिहारीलाल के दोहों की तुलना किससे की गई है?

उत्तर : देव से

12. #बिहारी की सतसई किस भाषा में रचित है?

उत्तर : राजभाषा

13. #बिहारीलाल के उपास्य देव कौन थे?

उत्तर : राधा-कृष्ण

14. '#पुरुष परीक्षा' किस भाषा की कृति है?

उत्तर : संस्कृत

15. #विद्यापति के पिता का नाम क्या था?

उत्तर : गणपति ठाकुर

16. #कबीर के उपास्य देव कौन थे?

उत्तर : निर्गुण ब्रह्म

17. '#सूरसागर' किस भाषा का ग्रंथ है

उत्तर :

18. '#साहित्य लहरी' के रचयिता कौन है?

उत्तर : सूरदास

19. '#रामचरितमानस' किस भाषा का ग्रंथ है?

उत्तर : 

20. #दोहा छंद मात्रिक है या वर्णिक?

उत्तर : मात्रिक

 21. #तुलसीदास की भक्ति किस भाव की थी?

उत्तर : दास्य भाव

22. #मीराबाई की भक्ति किस भाव की थी?

उत्तर : मधुर भाव।




शनिवार, 9 जनवरी 2021

नामदेव : आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

नामदेव आचार्य रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में

महाराष्ट्र देश के प्रसिद्ध भक्त नामदेव (संवत् 1328-1408) ने हिंदू मुसलमान दोनों के लिए एक सामान्य भक्तिमार्ग का भी आभास दिया।

(हिंदी साहित्य का इतिहास : भक्तिकाल : प्रकरण-1 : सामान्य परिचय)

यह सामान्य भक्तिमार्ग एकेश्वरवाद का एक निश्चित स्वरूप लेकर खड़ा हुआ, जो कभी ब्रह्मवाद की ओर ढलता था और कभी पैगंबरी खुदावाद की ओर। यह 'निर्गुणपंथ' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसकी ओर ले जानेवाली सबसे पहली प्रवृत्ति जो लक्षित हुई वह ऊँच नीच और जाति-पाँति के भाव का त्याग और ईश्वर की भक्ति के लिए मनुष्य मात्र के समान अधिकार का स्वीकार था। इस भाव का सूत्रपात भक्तिमार्ग के भीतर महाराष्ट्र और मध्य देश में नामदेव और रामानंद जी द्वारा हुआ। महाराष्ट्र देश में नामदेव का जन्मकाल शक संवत् 1192 और मृत्युकाल शक संवत् 1272 प्रसिद्ध है। ये दक्षिण के नरुसीबमनी (सतारा जिला) के दरजी थे। पीछे पंढरपुर के विठोबा (विष्णु भगवान) के मंदिर में भगवद्भजन करते हुए अपना दिन बिताते थे।

महाराष्ट्र के भक्तों में नामदेव का नाम सबसे पहले आता है। मराठी भाषा के अभंगों के अतिरिक्त इनकी हिन्दी रचनाएँ भी प्रचुर परिमाण में मिलती हैं। इन हिन्दी रचनाओं में एक विशेष बात यह पाई जाती है कि कुछ तो सगुणोपासना से संबंध रखती हैं और कुछ निर्गुणोपासना से। इसके समाधन के लिए इनके समय की परिस्थिति की ओर ध्यान देना आवश्यक है। आदिकाल के अन्तर्गत यह कहा जा चुका है कि मुसलमानों के आने पर पठानों के समय में गोरखपंथी योगियों का देश में बहुत प्रभाव था। नामदेव के ही समय में प्रसिद्ध ज्ञानयोगी ज्ञानदेव हुए हैं जिन्होंने अपने को गोरख की शिष्य परंपरा में बताया है। ज्ञानदेव का परलोकवास बहुत थोड़ी अवस्था में ही हुआ, पर नामदेव उनके उपरांत बहुत दिनों तक जीवित रहे। नामदेव सीधे सादे सगुण भक्ति मार्ग पर चले जा रहे थे, पर पीछे उस नाथपंथ के प्रभाव के भीतर भी ये लाए गए, जो अंतर्मुख साधना द्वारा सर्वव्यापक निर्गुणब्रह्म के साक्षात्कार को ही मोक्ष का मार्ग मानता था। लाने वाले थे ज्ञानदेव।

एक बार ज्ञानदेव इन्हें साथ लेकर तीर्थयात्रा को निकले। मार्ग में ये अपने प्रिय विग्रह विठोबा (भगवान) के वियोग में व्याकुल रहा करते थे। ज्ञानदेव इन्हें बराबर समझाते जाते थे कि 'भगवान क्या एक ही जगह हैं; वे तो सर्वत्र हैं, सर्वव्यापक हैं। यह मोह छोड़ो। तुम्हारी भक्ति अभी एकांगी है, जब तक निर्गुण पक्ष की भी अनुभूति तुम्हें न होगी, तब तक तुम पक्के न होगे'। ज्ञानदेव की बहन मुक्ताबाई के कहने पर एक दिन 'संतपरीक्षा' हुई। जिस गाँव में यह संत मंडली उतरी थी, उसमें एक कुम्हार रहता था। मंडली के सब संत चुपचाप बैठ गए। कुम्हार घड़ा पीटने का पिटना लेकर सबके सिर पर जमाने लगा। चोट पर चोट खाकर भी कोई विचलित न हुआ। पर जब नामदेव की ओर बढ़ा तब वे बिगड़ खड़े हुए। इस पर वह कुम्हार बोला, 'नामदेव को छोड़ और सब घड़े पक्के हैं'। बेचारे नामदेव कच्चे घड़े ठहराए गए। इस कथा से यह स्पष्ट लक्षित हो जाता है कि नामदेव को नाथपंथ के योगमार्ग की ओर प्रवृत्त करने के लिए ज्ञानदेव की ओर से तरह-तरह के प्रयत्न होते रहे।

सिद्ध और योगी निरंतर अभ्यास द्वारा अपने शरीर को विलक्षण बना लेते थे। खोपड़ी पर चोटें खा खाकर उसे पक्की करना उनके लिए कोई कठिन बात न थी। अब भी एक प्रकार के मुसलमान फकीर अपने शरीर पर जोर-जोर से डंडे जमाकर भिक्षा माँगते हैं।

नामदेव किसी गुरु से दीक्षा लेकर अपनी सगुण भक्ति में प्रवृत्त नहीं हुए थे, अपने ही हृदय की स्वाभाविक प्रेरणा से हुए थे। ज्ञानदेव बराबर उन्हें 'बिनु गुरु होइ न ज्ञान' समझाते आते थे। संतों के बीच निर्गुण ब्रह्म के संबंध में जो कुछ कहा-सुना जाता है और ईश्वरप्राप्ति की जो साधना बताई जाती है, वह किसी गुरु की सिखाई हुई होती है। परमात्मा के शुद्ध निर्गुणस्वरूप के ज्ञान के लिए ज्ञानदेव का आग्रह बराबर बढ़ता गया। गुरु के अभाव के कारण किस प्रकार नामदेव में परमात्मा की सर्वव्यापकता का उदार भाव नहीं जम पाया था और भेदभाव बना था, इस पर भी एक कथा चली आती है। कहते हैं कि एक दिन स्वयं विठोबा (भगवान) एक मुसलमान फकीर का रूप धरकर नामदेव के सामने आए। नामदेव ने उन्हें नहीं पहचाना। तब उनसे कहा गया कि वे तो परब्रह्म भगवान ही थे। अंत में बेचारे नामदेव ने नागनाथ नामक शिव के स्थान पर जाकर बिसोबा खेचर या खेचरनाथ नामक एक नाथपंथी कनफटे से दीक्षा ली। 

यह बात समझ रखनी चाहिए कि नामदेव के समय में ही देवगिरि पर पठानों की चढ़ाइयाँ हो चुकी थीं और मुसलमान महाराष्ट्र में भी फैल गए थे। इसके पहले से ही गोरखनाथ के अनुयायी हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के लिए अंतस्साधना के एक सामान्य मार्ग का उपदेश देते आ रहे थे।

इनकी भक्ति के अनेक चमत्कार भक्तमाल में लिखे हैं, जैसे विठोबा (ठाकुर जी) की मूर्ति का इनके हाथ से दूध पीना, अविंद नागनाथ के शिवमंदिर के द्वार का इनकी ओर घूम जाना इत्यादि। इनके माहात्म्य ने यह सिद्ध कर दिखाया कि 'जाति-पाँति पूछै नहिं कोई। हरि को भजै सो हरि का होई।'

धनि धनि बनखंड वृंदावना, जहँ खेलै श्रीनारायना।

बेनु बजावै, गोधन चारै, नामे का स्वामि आनंद करै

यह तो हुई नामदेव की व्यक्तोपासना संबंधी हृदयप्रेरित रचना। आगे गुरु से सीखे हुए ज्ञान की उद्धरणी अर्थात् 'निर्गुन बानी' भी कुछ देखिए

माइ न होती, बाप न होते, कर्म्म न होता काया।

हम नहिं होते, तुम नहिं होते, कौन कहाँ ते आया।

 

चंद न होता, सूर न होता, पानी पवन मिलाया।

शास्त्र न होता, वेद न होता, करम कहाँ ते आया

 

पांडे तुम्हरी गायत्री लोधो का खेत खाती थी।

लै करि ठेंगा टँगरी तारी लंगत लंगत आती थी

पांडे तुम्हरा महादेव धौल बलद चढ़ा आवत देखा था।

पांडे तुम्हारा रामचंद सो भी आवत देखा था

रावन सेंती सरबर होई, घर की जोय गँवाई थी।

हिंदू अंध तुरुकौ काना, दुहौ ते ज्ञानी सयाना

 

हिंदू पूजै देहरा, मुसलमान मसीद।

नामा सोई सेविया जहँ देहरा न मसीद

सगुणोपासक भक्त भगवान के सगुण और निर्गुण दोनों रूप मानता है, पर भक्ति के लिए सगुण रूप ही स्वीकार करता है, निर्गुण रूप ज्ञानमार्गियों के लिए छोड़ देता है। सब सगुणमार्गी भक्त भगवान के व्यक्त रूप के साथ-साथ उनके अव्यक्त और निर्विशेष रूप का भी निर्देश करते आए हैं जो बोधगम्य नहीं। वे अव्यक्त की ओर संकेत भर करते हैं, उसके विवरण में प्रवृत्त नहीं होते। नामदेव क्यों प्रवृत्त हुए, यह ऊपर दिखाया जा चुका है। जबकि उन्होंने एक गुरु से ज्ञानोपदेश लिया तब शिष्यधर्मानुसार उसकी उद्धरणी आवश्यक हुई।

नामदेव की रचनाओं में यह बात साफ दिखाई पड़ती है कि सगुण भक्ति पदों की भाषा तो ब्रज या परंपरागत काव्य भाषा है, पर 'निर्गुण बानी' की भाषा नाथपंथियों द्वारा ग्रहीत खड़ी बोली या सधुक्कड़ी भाषा।

नामदेव की रचना के आधर पर यह कहा जा सकता है कि 'निर्गुणपंथ' के लिए मार्ग निकालनेवाले नाथपंथ के योगी और भक्त नामदेव थे। जहाँ तक पता चलता है, 'निर्गुण मार्ग' के निर्दिष्ट प्रवर्तक कबीरदास ही थे जिन्होंने एक ओर तो स्वामी रामानंद जी के शिष्य होकर भारतीय अद्वैतवाद की कुछ स्थूल बातें ग्रहण कीं और दूसरी ओर योगियों और सूफी फकीरों के संस्कार प्राप्त किए। वैष्णवों से उन्होंने अहिंसावाद और प्रपत्तिवाद लिए। इसी से उनके तथा 'निर्गुणवाद' वाले और दूसरे संतों के वचनों में कहीं भारतीय अद्वैतवाद की झलक मिलती है तो कहीं योगियों के नाड़ीचक्र की, कहीं सूफियों के प्रेमतत्व की, कहीं पैगंबरी कट्टर खुदावाद की और कहीं अहिंसावाद की। अत: तात्विक दृष्टि से न तो हम इन्हें पूरे अद्वैतवादी कह सकते हैं और न एकेश्वरवादी। दोनों का मिलाजुला भाव इनकी बानी में मिलता है। इनका लक्ष्य एक ऐसी सामान्य भक्ति पद्धति का प्रचार था जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों योग दे सकें और भेदभाव का कुछ परिहार हो। बहुदेवोपासना, अवतार और मूर्तिपूजा का खंडन ये मुसलमानी जोश के साथ करते थे और मुसलमानों की कुरबानी (हिंसा), नमाज, रोजा आदि की असारता दिखाते हुए ब्रह्म, माया, जीव, अनहद नाद, सृष्टि, प्रलय आदि की चर्चा पूरे हिंदू ब्रह्मज्ञानी बनकर करते थे। सारांश यह कि ईश्वरपूजा की उन भिन्न भिन्न बाह्य विधियों पर से ध्यान हटाकर, जिनके कारण धर्म में भेदभाव फैला हुआ था, ये शुद्ध ईश्वर प्रेम और सात्विक जीवन का प्रचार करना चाहते थे।

इस प्रकार देश में सगुण और निर्गुण के नाम से भक्तिकाव्य की दो धराएँ विक्रम की पंद्रहवीं शताब्दी के अंतिम भाग से लेकर सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक समानांतर चलती रहीं। भक्ति के उत्थान काल के भीतर हिन्दी भाषा की कुछ विस्तृत रचना पहले पहल कबीर ही की मिलती है। अत: पहले निर्गुण मत के संतों का उल्लेख उचित ठहरता है। यह निर्गुण धरा दो शाखाओं में विभक्त हुई एक तो ज्ञानाश्रयी शाखा और दूसरी शुद्ध प्रेममार्गी शाखा (सूफियों की)।

पहली शाखा भारतीय ब्रह्मज्ञान और योगसाधना को लेकर तथा उसमें सूफियों के प्रेमतत्व को मिलाकर उपासना के क्षेत्र में अग्रसर हुई और सगुण के खंडन में उसी जोश के साथ तत्पर रही जिस जोश के साथ पैगंबरी मत बहुदेवोपासना और मूर्तिपूजा आदि के खंडन में रहते हैं। इस शाखा की रचनाएँ साहित्यिक नहीं हैं फुटकल दोहों या पदों के रूप में हैं जिनकी भाषा और शैली अधिकतर अव्यवस्थित और ऊटपटाँग है। कबीर आदि दो एक प्रतिभासंपन्न संतों को छोड़ औरों में ज्ञानमार्ग की सुनी सुनाई बातों का पिष्टपेषण तथा हठयोग की बातों के कुछ रूपक भद्दी तुकबंदियों में हैं। भक्तिरस में मग्न करने वाली सरसता भी बहुत कम पाई जाती है। बात यह है कि इस पंथ का प्रभाव शिष्ट और शिक्षित जनता पर नहीं पड़ा, क्योंकि उसके लिए न तो इस पंथ में कोई नई बात थी, न नया आकर्षण। संस्कृत बुद्धि , संस्कृत हृदय और संस्कृत वाणी का वह विकास इस शाखा में नहीं पाया जाता जो शिक्षित समाज को अपनी ओर आकर्षित करता। पर अशिक्षित और निम्न श्रेणी की जनता पर इन संत महात्माओं का बड़ा भारी उपकार है। उच्च विषयों का कुछ आभास देकर, आचरण की शुद्ध ता पर जोर देकर, आडंबरों का तिरस्कार करके, आत्मगौरव का भाव उत्पन्न करके, इन्होंने इसे ऊपर उठाने का स्तुत्य प्रयत्न किया। पाश्चात्यों ने इन्हें जो 'धर्मसुधरक' की उपाधि दी है, वह इसी बात को ध्यान में रखकर।

(हिंदी साहित्य का इतिहास : भक्तिकाल : प्रकरण-1 : सामान्य परिचय)

नामदेव और कबीर आदि की तो बात ही क्या, तुलसीदास ने भी गनी, गरीब, साहब, इताति, उमरदराज आदि बहुत से शब्दों का प्रयोग किया।

(हिंदी साहित्य का इतिहास : रीतिकाल : प्रकरण-1 : सामान्य परिचय)

नामदेव और कबीर की रचना में हम खड़ी बोली का पूरा स्वरूप दिखा आए हैं और यह सूचित कर चुके हैं कि उसका व्यवहार अधिकतर सधुक्कड़ी भाषा के भीतर हुआ करता था। शिष्ट साहित्य के भीतर परंपरागत काव्यभाषा का ही चलन रहा।

(हिंदी साहित्य का इतिहास : आधुनिक काल : प्रकरण-2 : नई धारा : प्रथम)

 

 

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

UGCNTA-NET/JRF J-2020 (20 Hindi solved paper)

 UGCNTA-NET/JRF J-2020 (20 Hindi solved paper)

2nd Shift 13/11/2020

1. हिंदी की लोकनाट्यशैलियों को प्रदेशों के साथ सुमेलित कीजिए :

      सूची-I सूची-Ii

(A) सॉन्ग (i) उत्तर प्रदेश

(B) नौटंकी (ii) मालवा (मध्य प्रदेश)

(C) माच (iii) छत्तीसगढ़

(D) नाचा (iv) हरियाणा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

     A B C D

(A) 4 1 2 3

(B) 2 1 3 4

(C) 4 3 2 1

 (D) 3 1 4 2

Ans. : (A) 4 1 2 3 

(A) सॉन्ग हरियाणा 

(B) नौटंकी उत्तर प्रदेश

(C) माच मालवा (मध्य प्रदेश)

(D) नाचा छत्तीसगढ़


2. नामवर सिंह द्वारा रचित पुस्तक के हैं :

(A) कहानी : नई कहानी

(B) साहित्य के सौंदर्यशास्त्र की भूमिका

(C) इतिहास और आलोचना

(D) भक्ति काव्य और लोकजीवन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(A) केवल (A) और (B)

(B) केवल (B) और (C)

(C) केवल (C) और (D) 

(D) केवल (A) और (C)

Ans. : केवल (A) कहानी‌ : नहीं कहानी और (C) इतिहास और आलोचना


3. जगदीश चंद्र माथुर द्वारा रचित उपन्यास है :

(A) धरती धन न अपना

(B) यथाप्रस्तावित

(C) क़िस्सा ग़ुलाम

(D) मुट्ठी भर कांकर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए :

(A) केवल (B) और (C)

(B) केवल (A) और (D)

(C) केवल (C) और (D)

(D) केवल (B) और (D)

Ans. : (B) केवल (A) धरती धन न अपना और (D) मुट्ठी भर कांकर


4. निम्नलिखित में से कौन सी भाषा आर्य भाषाओं में शामिल नहीं है ?

(A) संस्कृत (B) प्राकृत

(C) तुर्की (D) अंग्रेज़ी

Ans. : (C) तुर्की


5. नीचे दो कथन दिए गए हैं : 

कथन समर्पण सगुण भक्ति का मूल है।

कथन भक्ति आंदोलन एकमात्र अद्वैतवाद से प्रभावित रहा।

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनें : 

(A) कथन (S) और (B) दोनों सही हैं।

(B) कथन (A) और (B) दोनों गलत हैं।

(C) कथन (A) सत्य है, किंतु कथन (B) ग़लत है।

(D) कथन (A) असत्य है, किंतु कथन (B) सही है।

Ans. : (C) कथन (A) सत्य है, किंतु कथन (B) ग़लत है।


6. बिंबवाद का संबंध निम्नलिखित में से किससे है : 

(A) जॉर्ज लुकाच 

(B) एजरा पाउंड 

(C) डेनियल बेल 

(D) जाक देरिदा

Ans. : (B) एजरा पाउंड (अमेरिका)


7. निम्नलिखित में से दिनकर-काव्य की विशेषताएं कौन सी हैं?

(A) जातिवादी व्यवस्था का विरोध

(B) सपाट बयानी

(C) युद्ध का तात्विक चिंतन और शोषण का विरोध

(D) व्यक्ति स्वातंत्र्य की प्रतिष्ठा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(A) (A) और (B)

(B) (A) और (C)

(C) (B) और (C)

(D) (C) और (D)

Ans. : (B) (A) (A) जातिवादी व्यवस्था का विरोध और (C) युद्ध का तात्विक चिंतन और शोषण का विरोध


8. मानव प्रवृत्ति हों अथवा मनो विकारों को पात्र के रूप में उपस्थित कर नाटकीय द्वंद्व की सृष्टि करने वाला जयशंकर प्रसाद का नाटक है :

(1) विशाख (2) कामना 

(3) सज्जन (4) प्रायश्चित

Ans. : (2) कामना


9. निर्मल वर्मा की कहानियों की दुनिया है :

(1) हताश और आत्म शपरक नायकों की

(2) अकेलेपन और अलगाव की

(3) प्रतिरोध और विद्रोह की

(4) राष्ट्रीय चेतना की

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(1) केवल (A) और (C)

(2) केवल (A) और (B)

(3) केवल (B) और (C)

(4) केबल (C) और (D)

Ans. : (2) केवल (A) हताशा और आत्मपरक नायकों की और (B) अकेलेपन और अलगाव की


10. शरद जोशी द्वारा रचित निबंध हैं : 

(1) जीप पर सवार इल्लियां

(2) विषकन्या

(3) यत्र तत्र सर्वत्र

(4) आड़ू का पेड़

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(1) केवल (A) और (B) 

(2) केवल (A) और (C)

(3) केवल (B) और (C)

(4) केवल (C) और (D) 

Ans. : (2) केवल (A) जीप पर सवार इल्लियां और (C) यत्र तत्र सर्वत्र


11. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए : 

(A) आनंद कादंबिनी (1) सदानंद मिश्र

(B) समालोचक (2) राधाचरण गोस्वामी

(C) भारतेंदु (3) प्रेमघन

(D) सार सुधानिधि (4) चंद्रधर शर्मा गुलेरी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

(A) 2 4 1 3

(B) 1 3 4 2

(C) 3 4 2 1

(D) 4 1 3 2

Ans. : (C) 3 4 2 1

(A) आनंद कादंबिनी (3) प्रेमघन 

(B) समालोचक (4) चंद्रधर शर्मा गुलेरी

(C) भारतेंदु (2) राधाचरण गोस्वामी

(D) सार सुधानिधि (1) सदानंद मिश्र



12. निम्नलिखित भाषाओं को विकास के उनके क्रम में व्यवस्थित कीजिए : 

(A) प्राचीन संस्कृत 

(B) शौरसेनी

(C) लौकिक संस्कृत 

(D) पश्चिमी हिंदी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

(A) (A) (C) (B) (D)

(B) (A) (B) (C) (D)

(C) (B) (C) (A) (D)

(D) (C) (D) (A) (B)

Ans. : (A) (A) प्राचीन संस्कृत (C) लौकिक संस्कृत (B) शौरसेनी (D) पश्चिमी हिंदी


13. निम्नलिखित निबंध-संग्रहों को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-I सूची-II

(A) आस्था और सौंदर्य (1) अध्यापक पूर्ण सिंह

(B) अनुसंधान और आलोचना (2) नामवर सिंह

(C) आचरण की सभ्यता (3) नगेंद्र

(D) वाद विवाद संवाद (4) रामविलास शर्मा

      A B C D

(A) 4 3 1 2

(B) 1 2 3 4

(C) 2 3 4 1

(D) 3 4 2 1

Ans. : (A) 4 3 1 2

आस्था और सौंदर्य (रामविलास शर्मा)

अनुसंधान और आलोचना (नागेंद्र)

आचरण की सभ्यता (अध्यापक पूर्ण सिंह)

वाद विवाद संवाद (नामवर सिंह)


14. 'दब्ब--सहाब-- पयास' (द्रव्य-- स्वभाव प्रकाश) को गाथा या साहित्य की प्राकृत में निम्नलिखित में से किसने रूपांतरित किया है?

(A) वररुचि (B) देव सेन (C) पुष्पदंत (D) माइल्ल धवल

Ans. : (D) माइल्ल धवल


15. हरिकृष्ण प्रेमी के नाटकों का मुख्य स्वर है : 

(A) स्वातंत्र्योत्तर नए भाव बोध का विकास

(B) प्रखर राष्ट्रीय चेतना युक्त ऐतिहासिकता

(C) सांप्रदायिक सौहार्द्र की मूल्य चेतना

(D) पश्चिमी बौद्धिकता का प्राधान्य

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(A) केवल (A) और (B)

(B) केवल (B) और (D) 

(C) केवल (C) और (D)

(D) केवल (B) और (D)

Ans. : (B) (B) प्रखर राष्ट्रीय चेतना युक्त ऐतिहासिकता और (D) पश्चिमी बौद्धिकता का प्राधान्य


16. निम्नलिखित में से रामविलास शर्मा की पुस्तकें हैं : 

(A) आलोचना के मान

(B) प्रेमचंद और उनका युग

(C) रामपुरा का मूल्यांकन

(D) नई कविता

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(A) केवल (B) और (C)

(B) केवल (A) और (B) 

(C) केवल (C) और (D)

(D) केवल (S) और (D)

Ans. : (A) केवल (B) और (C)


17. "खड़ी बोली मैं इतना बड़ा काव्य अभी तक नहीं निकला है। बड़ी भारी विशेषता इस काव्य की यह है कि यह सारा संस्कृत के वर्ण वृत्तों में है जिसमें अधिक परिमाण में रचना करना कठिन काम है।"

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने यह मत किस ग्रंथ के लिए प्रकट किया है : 

(A) साकेत

(B) सांध्य अटन

(C) कामायनी

(D) प्रियप्रवास

Ans. : (D) प्रियप्रवास


18. निम्नलिखित में से किस उपन्यास में बाल वय: संधि और किशोर मन के मनोवैज्ञानिक अंकन का प्रयास किया गया है ?

(A) शेखर : एक जीवनी

(B) त्यागपत्र

(C) पर्दे की रानी

(D) जयवर्धन

Ans. : (A) शेखर : एक जीवनी


19. स्त्री-विमर्श की मूल स्थापना नहीं है :

(A) सतीत्व ही स्त्रीत्व है।

(B) स्त्री के स्वतंत्र व्यक्तित्व की स्वीकार्यता

(C) सामाजिक योजनाओं से मुक्ति

(D) परिवार संस्था का जनतांत्रीकरण

Ans. : (A) सतीत्व ही स्त्रीत्व है।


20. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार निम्नलिखित में से) कौन-सा पंच विडाल में शामिल नहीं है ?

(A) आलस्य

(B) हिंसा

(C) चिकित्सा

(D) अहंकार

Ans. : (D) अहंकार


21. मैला आंचल उपन्यास के पात्र नहीं हैं : 

(A) प्रशांत और कालीचरण

(B) श्रीधर और सरस्वती

(C) कमली और सुमरित दास

(D) हरगौरी सिंह और मंगला देवी

Ans. : (B) श्रीधर और९ सरस्वती


22. संविधान के अनुच्छेद 343 में संघ की राजभाषा के बारे में निम्नलिखित में से कौन से प्रावधान किए गए हैं ?

(A) संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।

(B) शासकीय प्रयोजनों के लिए भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप मान्य होगा।

(C) राजभाषा के बारे में राष्ट्रपति एक आयोग का गठन करेंगे।

(D) उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय की संपूर्ण कार्रवाई अंग्रेज़ी भाषा में ही होगी।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए : 

(A) केवल (A) और (C)

(B) केवल (A) और (B) 

(C) केवल (B) (C) और (D)

(D) केवल (A) (B) और (C)

Ans. : (B) केवल (A) और (B) 


23. 'लछमी दासिन' निम्नलिखित में से किस उपन्यास की पात्र है ?

(A) मैला अंचल

(B) परती परिकथा

(C) जुलूस

(D) कितने चौराहे

Ans. : (A) मैला अंचल


24. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए :

       सूची-I सूची-II

(A) रम्य कल्पना (1) टी. एस. इलियट

(B) मूल्य सिद्धांत (2) आई. ए. रिचर्ड्स

(C) परंपरा की अवधारणा (3) सैमुअल टेलर कॉलेरिज

(D) उत्तर आधुनिकतावाद (4) रोलां बार्थ

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

(A) 2 4 3 1

(B) 4, 3 2 1

(C) 3 2 1 4 

(D) 4 1 3 2

Ans. : (C) 3 2 1 4 


25. 'मुक्तिबोध की आत्मकथा' कृति के लेखक हैं : 

(A) विष्णुचंद्र शर्मा

(B) नामवर सिंह

(C) रमेशचंद्र शाह

(D) हंसराज रहबर

And. : (A) विष्णुचंद्र शर्मा


26. "आध्यात्मिक रंग के चश्मे आजकल बहुत सस्ते हो गए हैं।" रामचंद्र शुक्ल ने यह टिप्पणी किस कवि के संदर्भ में की है?

(A) बिहारी

(B) विद्यापति

(C) रसखान

(D) मलूक दास

Ans. : (B) विद्यापति


27. निम्नलिखित में से कौन-से अज्ञेय के काव्य हैं ?

(A) भग्नदूत

(B) आत्मा की आंखें

(C) आत्महत्या के विरुद्ध

(D) चिंता

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

(A) केवल (A) और (C)

(B) केवल (A) और (D) 

(C) केवल (B) और (C)

(D) केवल (C) और (D)

Ans. : (B) केवल (A) भग्नदूत और (D) चिंता


28. अभिजात्य वर्गीय परिवार की कठोर अनुशासनबद्धता के ज़ुल्म और विद्रोह तथा मशीनी ज़िंदगी से मुक्ति का चित्रण निम्नलिखित में से किस नाटक की विषय वस्तु है?

(A) क़ैद

(B) अलग-अलग रास्ते

(C) अंजो दीदी

(D) उड़ान

Ans. : (C) अंजो दीदी


29. हरिशंकर परसाई द्वारा रचित निबंध-संग्रह हैं :

(A) तुलसीदास चंदन घिसैं

(B) अपनी-अपनी बीमारी

(C) बबूल और कैक्टस

(D) एक बार जुगनू की

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :

(A) केवल (A) और (B)

(B) केवल (B) और (C) 

(C) केवल (S) और (D)

(D) केवल (A) और (C)

Ans. : (A) केवल (A) तुलसीदास चंदन घिसैं और (B) अपनी-अपनी बीमारी


30. निम्नलिखित में से महाकाल लाल चतुर्वेदी की रचनाएं हैं :

(A) स्वर्णधूलि

(B) हिमकिरीटिनी

(C) विष्णुप्रिया

(D) हिमतरंगिणी

नीचे दिए गए विकल्पों में सेऐ सही उत्तर चुनिए :

(A) केवल (C) और (D)

(B) केवल (A) और (B) 

(C) केवल (B) और (D)

(D) केवल (A) और (C)

Ans. : (C) केवल (B) हिमकिरीटिनी और (D) हिमतरंगिणी 


31. "नई कहानी आग्रहों की कहानी नहीं है, प्रवृत्तियों की हो सकती है और उसका मूल्य स्रोत है जीवन का यथार्थबोध और इस यथार्थ को लेकर चलने वाला वह विराट मध्य और निम्न वर्ग है जो अपनी जीवन शक्ति से आज के दुर्दांत संकट को जाने-अनजाने झेल रहा है।" 

उपर्युक्त कथन किस लेखक ने नई कहानी के संदर्भ में कहा है?

(A) भीष्म साहनी

(B) शिवप्रसाद सिंह

(C) राजेंद्र यादव

(D) कमलेश्वर

Ans. : D) कमलेश्वर


32. "इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम इस युग के साहित्य में वांछनीय नहीं है। अपने किस नाटक की भूमिका में लक्ष्मीनारायण मिश्र ने जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक नाटकों की प्रतिक्रिया में यह बात कही?

(A) संन्यासी

(B) मुक्ति का रहस्य

(C) सिंदूर की होली

(D) राजयोग

Ans. : (A) संन्यासी

33 से 100 तक के प्रश्नोत्तर के लिए निम्नलिखित लिंक देखें

https://www.hindisahityavimarsh.com/question-answer/1056-ntaugcnetjrf-j-2020-20-hindi-soleved-paper/


शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

NTA UGC NET2020 (Ans Key Hindi-20)

 NTA UGC NET2020 (Ans Key Hindi-20)

Date : 13/11/2020

Time : 02:00 to 05:00

(2nd Shift)

1. 1

2. 4

3. 2

4. 3

5. 3

6. 1

7. 2

8. 1

9. 2

10. 2

11. 3

12. 1

13. 1

14. 4

15. 2

16. 1

17. 4

18. 1

19. 1

20. 4

21. 2

22. 2

23. 1

24. 3

25. 1

26. 2

27. 2

28. 3

29. 1

30. 3

31. 4

32. 1

33. 4

34. 2

35. 1

36. 2

37. 2

38. 3

39. 2

40. 4

41. 1

42. 4

43. 3

44. 2

45. 1

46. 4

47. 1

48. 1

49. 3

50. 4

51. 3

52. 3

53. 1

54. 1

55. 4

56. 1

57. 4

58. 2

59. 3

60. 2

61. 4

62. 1

63. 2

64. 4

65. 1

66. 4

67. 1

68. 4

69. 2

70. 1

71. 1

72. 2

73. 3

74. 1

75. 4

76. 4

77. 2

78. 1

79. 1

80. 3

81. 2

82. 1

83. 4

84. 4

85. 1

86. 2

87. 1

88. 1

89. 2

90. 4

91. 2

92. 4

93. 2

94. 2

95. 4

96. 4

97. 3

98. 3

99. 1

100. 2

बुधवार, 18 नवंबर 2020

NTA/UGC NET/JRF2020 (ans keys)

 NTA/UGC NET/JRF (ans keys)

Date : 13/11/2020

Time : 09:00 A. M. To 12:00 A. M

Subject : 20 Hindi

NTA/UGCNET/JRF2020 (Ans Keys)

Date : 13/11/2020

Time : 09:00 to 12:00 A. M.

Subject :  20 Hindi

1. (3)

2. (3)

3. (3)

4. (1)

5. (2)

6. (3)

7. (2)

8. (2)

9. (2)

10. (2)

11. (1)

12. (4)

13. (4)

14. (1)

15. (2)

16. (4)

17. (2)

18. (1)

19. (2)

20. (3)

21. (2)

22. (4)

23. (4)

24. (2)

25. (1)

26. (3)

27. (4)

28. (3)

29. (2)

30. (1)

31. (4)

32. (2)

33. (2)

34. (1)

35. (1)

36. (2)

37. (1)

38. (3)

39. (4)

40. (4)

41. (4)

42. (3)

43. (2)

44. (3)

45. (4)

46. (2)

47. (2)

48. (3)

49. (1)

50. (1)

51. (2)

52. (2)

53. (3)

54. (2)

55. (4)

56. (1)

57. (2)

58. (3)

59. (4)

60. (4)

61. (4)

62. (3)

63. (2)

64. (2)

65. (2)

66. (2)

67. (2)

68. (3)

69. (3)

70. (1)

71. (3)

72. (2)

73. (1)

74. (4)

75. (1)

76. (2)

77. (3)

78. (4)

79. (3)

80. (1)

81. (2)

82. (1)

83. (1)

84. (2)

85. (1)

86. (1)

87. (1)

88. (4)

89. (3)

90. (2)

91. (3)

92. (2)

93. (1)

94. (2)

95. (2)

96. (1)

97. (3)

98. (4)

99. (3)

100. (2)

42. प्रकाशन-वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कहानी-संग्रहों का सही क्रम बताइए :

(A) वाड.चू

(B) राजा निरबंसिया

(C) एक और जिंदगी

(D) यही सच है

सही उत्तर चुनिए :

1. (B), (C), (D), (A)

2. (A), (B), (C), (D)

3. (D), (C), (B), (A)

4. (C), (A), (D), (B)

1, 2, 3, 4 मैं से कोई उत्तर सही नहीं है।

सही उत्तर है :

(A) वाड.चू (1978, भीष्म साहनी)

(B) राजा निरबंसिया (1957, कमलेश्वर)

(C) एक और जिंदगी (1961, मोहन राकेश)

(D) यही सच है (1996, मन्नू भंडारी)

अतः सही क्रम इस प्रकार होगा : 

(B), (C), (A), (D)

शनिवार, 26 सितंबर 2020

भाषा और साहित्य वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी-ii

 भाषा और साहित्य वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी-ii


1. इनमें से कौन सी रचना #अवधी मैं #नहीं है?

(A) padmaavat/ पद्मावत (B) मधुमालती (C) #कवितावली (D) नूर जवाहर

Ans : (C) कवितावली

2. "#देसील बयना सब जग मिट्ठा।" यह कथन किसका है? 

(A) सूरदास (B) तुलसीदास 

(C) कबीरदास (D) विद्यापति 

Ans : (D) #विद्यापति

3. "#हिंदी नई चाल में ढली, 1873 ईस्वी में।"

उपर्युक्त कथन किसका है?

(A) रामचंद्र शुक्ल (B) रामविलास शर्मा

 (C) हजारी प्रसाद द्विवेदी (D) #भारतेंदु हरिश्चंद्

Ans : (D) bhartendu Harishchandra/भारतेंदु हरिश्चंद्र 

4. "#आधुनिक काल में गद्य का आविर्भाव सबसे प्रधान घटना है।" 

उपर्युक्त कथन किसका है?

(A) हजारी प्रसाद द्विवेदी (B) रामचंद्र शुक्ल

(C) गुलाब राय (D) नंददुलारे वाजपेयी

Ans : (B) #रामचंद्र शुक्ल

5. '#उज्जवल नीलमणि' किस आचार्य की रचना है? 

(A) मधुसूदन सरस्वती (B) रामानुजाचार्य 

(C) रामानंद (D) रूपगोस्वामी

Ans : (D) #रूपगोस्वामी

रविवार, 20 सितंबर 2020

घुमक्कड़ शास्त्र (राहुल सांकृत्यायन)


घुमक्कड़ ल्शास्त्रत (राहुल सांकृत्यायन)

"संसार में यदि कोई अनादि धर्म है तो वह घुमक्कड़ धर्म है। लेकिन वह संकुचित संप्रदाय नहीं है। आकाश की तरह महान है, समुद्र की तरह विशाल है, जिन धर्मों ने अधिक यश प्राप्त किया है, वह केवल घुमक्कड़ धर्म के कारण।"

(राहुल सांकृत्यायन, घुमक्कड़शास्त्र)

https://www.hindisahityavimarsh.com