बुधवार, 16 मई 2018

UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-2


UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-2


31. नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग
खिला हो ज्यों बिजली का फूल, मेघ वन बीच गुलाबी रंग ।
౼इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
(A) उपमा (B) उत्प्रेक्षा (C) रूपक (D) दृष्टान्त
31. (C) रूपक

32. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को सुमेलित कीजिए :
(A) नैया बीच नदिया डूबति जाय (1) रहीम
(B) अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काज (2) कबीर
(C) गुरु सुआ जेइ पंथ दिखावा (3) ख़ुसरो
(D) तबलग ही जीवो भलो देबौ होय न धीम (4) जायसी
(5) मलूकदास
कोड :
a b c d
(A) 5 1 2 3
(B) 2 5 4 1
(C) 2 3 5 1
(D) 2 1 5 4
32. (B)
(A) नैया बीच नदिया डूबति जाय (कबीर)
(B) अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काज (मलूकदास)
(C) गुरु सुआ जेइ पंथ दिखावा (जायसी)
(D) तबलग ही जीवो भलो देबौ होय न धीम (रहीम)

33. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) ये उपमान मैले हो गये हैं (i) अज्ञेय
(B) हम राज्य लिये मरते हैं (ii) बिहारी
(C) बतरस लालच लाल की (iii) मैथिलीशरण गुप्त
(D) भक्तिहिं ज्ञानहिं नहिं कछु भेदा (iv) तुलसीदास (v) पंत

कूट :
a b c d
(A) (v) (i) (ii) (iii)
(B) (i) (iii) (ii) (iv)
(C) (i) (ii) (iii) (iv)
(D) (iv) (v) (i) (ii)
33. (B)
(A) ये उपमान मैले हो गये हैं (अज्ञेय)
(B) हम राज्य लिये मरते हैं (मैथिलीशरण गुप्त)
(C) बतरस लालच लाल की (बिहारी)
(D) भक्तिहिं ज्ञानहिं नहिं कछु भेदा (तुलसीदास)

34. निम्नलिखित गद्य-पंक्तियों को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है (i) प्रेमचन्द
(B) अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन (ii) प्रसाद
(C) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल (iii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(D) मर्द साठे पर पाठे होते हैं (iv) रामचन्द्र शुक्ल
(v) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
कूट :
a b c d
(A) (i) (ii) (iii) (iv)
(B) (v) (i) (ii) (iii)
(C) (iv) (ii) (iii) (i)
(D) (i) (iv) (v) (iii)
34. (C)
(A) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है (रामचन्द्र शुक्ल)
(B) अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन (प्रसाद)
(C) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
(D) मर्द साठे पर पाठे होते हैं (प्रेमचन्द)

35. ‘‘नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी’’ ౼ये काव्य-पंक्तियां किस कवि की हैं ?
(A) पद्माकर
(B) मतिराम
(C) घनानन्द
(D) देव
35. (A) पद्माकर

36. ‘‘सखि वे मुझसे कहकर जाते’’ ౼किस कवि काव्य-पंक्ति हैं ?
(A) सियारामशरण गुप्त
(B) मैथिलीशरण गुप्त
(C) अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध
(D) जगदीश गुप्त
36. (B) मैथिलीशरण गुप्त

37. सुमेलित कीजिए :
(A) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल (i) नानकदेव
(B) प्रभुजी मेरे अवगुण चित्त न धरो (ii) कबीर
(C) अब लौं नसानी अब न नसै हौं (iii) सूरदास
(D) अव्वल अल्लह नूर उपाया क़ुदरत के सब बन्दे (iv) तुलसीदास
(v) मीराबाई
कूट :
a b c d
(A) (v) (iii) (iv) (i)
(B) (iv) (ii) (iii) (i)
(C) (iii) (iv) (v) (i)
(D) (ii) (iii) (iv) (v)
37. (A)
(A) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल (मीराबाई)
(B) प्रभुजी मेरे अवगुण चित्त न धरो (सूरदास)
(C) अब लौं नसानी अब न नसै हौं (तुलसीदास)
(D) अव्वल अल्लह नूर उपाया क़ुदरत के सब बन्दे (कबीर)

38. ‘‘आवत जात पनहियां टूटी बिसरि गयो हरि नाम’’ ౼यह पंक्ति किस कवि की है ?
(A) चतुर्भुजदास
(B) सूरदास
(C) कुंभनदास
(D) नन्ददास
38. (C) कुंभनदास

39. ‘‘कुन्दन को रंग फीको लगै, झलकै अति अंगनि चारु गौराई’’ ౼यह काव्य-पंक्ति किस कवि की है ?
(A) भूषण
(B) बिहारी
(C) देव
(D) मतिराम
39. (D) मतिराम

40. ‘‘आह, वेदना मिली विदाई’’ ౼किस नाटक के गीत की पंक्ति है?
(A) अजातशत्रु
(B) चन्द्रगुप्त
(C) स्कन्दगुप्त
(D) धवस्वामिनी
40. (C) स्कन्दगुप्त

41. ‘‘काव्यानुभूति की जटिलता चित्तवृत्तियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि संवादी-विसंवादी वृत्तियों के द्वन्द्व पर आधारित है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(A) रामचन्द्र शुक्ल
(B) नामवर सिंह
(C) नन्ददुलारे वाजपेयी
(D) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
41. (A) रामचन्द्र शुक्ल

42. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) धूप का तन दीप सी मैं (i) निराला
(B) मधुप गुनगुनाकर कह जाता (ii) पन्त
(C) स्नेह निर्झर बह गया है (iii) नरेन्द्र शर्मा
(D) हाय, मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन (iv) महादेवी
(v) प्रसाद
कूट :
a b c d
(A) (ii) (i) (iii) (iv)
(B) (iv) (v) (i) (ii)
(C) (v) (iii) (iv) (ii)
(D) (v) (ii) (i) (iii)
42. (B)
(A) धूप का तन दीप सी मैं (महादेवी)
(B) मधुप गुनगुनाकर कह जाता (प्रसाद)
(C) स्नेह निर्झर बह गया है (निराला)
(D) हाय, मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन (पन्त)

43. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) दोनों ओर प्रेम पलता है (1) प्रसाद
(B) धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध (2) तुलसीदास
(C) परहित सरिस धर्म नहीं भाई (3) निराला
(D) बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं (4) मैथिलीशरण गुप्त
(5) महादेवी
कूट :
a b c d
(A) (ii) (i) (v) (iv)
(B) (v) (ii) (i) (iv)
(C) (iv) (iii) (ii) (v)
(D) (ii) (ii) (iv) (i)
43. (C)
(A) दोनों ओर प्रेम पलता है (मैथिलीशरण गुप्त)
(B) धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध (निराला)
(C) परहित सरिस धर्म नहीं भाई (तुलसीदास)
(D) बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं (महादेवी)

44. सुमेलित कीजिए :
(A) शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (1) मम्मट
(B) तददौषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (2) विश्वनाथ
(C) रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्द काव्यम् (3) भामह
(D) वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (4) आनन्दवर्द्धन
(5) पंडितराज जगन्नाथ
कूट :
a b c d
(A) (v) (iv) (ii) (iii)
(B) (iii) (i) (v) (ii)
(C) (ii) (iii) (vi) (v)
(D) (i) (iv) (v) (ii)
44. (B)
(A) शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (भामह)
(B) तददौषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (मम्मट)
(C) रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्द काव्यम् (पंडितराज जगन्नाथ)
(D) वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (विश्वनाथ)

45. ‘‘प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी’’ ౼यह किसकी पंक्ति है ?
(A) सन्त दादूदयल
(B) रैदास
(C) सन्त पापा
(D) सन्त पल्टूदास
45. (B) रैदास

46. निम्नलिखित पंक्तियों और कवियों का सुमेलन कीजिए :
(A) कनक कदलि पर सिंह समारल ता पर मेरु समाने (1) घनानन्द
(B) नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी (2) रसखान
(C) अति सूधो सनेह को मारग है (3) विद्यापति
(D) मोर पखा सिर ऊपर राखि हों, कुंज की माल गले पहिरौगी (4) मतिराम
(5) पद्माकर
कूट :
a b c d
(A) (ii) (iii) (i) (iv)
(B) (iii) (v) (i) (ii)
(C) (v) (ii) (i) (iii)
(D) (iv) (iii) (ii) (v)
46. (B)
(A) कनक कदलि पर सिंह समारल ता पर मेरु समाने (विद्यापति)
(B) नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी (पद्माकर)
(C) अति सूधो सनेह को मारग है (घनानन्द)
(D) मोर पखा सिर ऊपर राखि हों, कुंज की माल गले पहिरौगी (रसखान)

47. ‘‘उज्ज्वल वरदान चेतना का, सौन्दर्य जिसे सब कहते हैं’’ ౼यह पंक्ति किस सर्ग से है ?
(A) श्रद्धा (B) आशा
(C) लज्जा (D) आनन्द
47. (C) लज्जा

48. ‘‘सुनिहै कथा कौन निर्गुन को, पचि पचि बात बनावत, सगुन सुमेरू प्रगट देखियत, तुम तृण की ओट दुरावत’’ ౼ये पंक्तियाँ किसकी हैं?
(A) सूरदास (B) नन्ददास
(C) कृष्णदास (D) परमानन्द दास
48. (A) सूरदास

49. ‘‘कितना अनुभूतिपूर्ण था वह एक क्षण का आलिंगन ?’’ ౼ यह कथन किस रचना से है ?
(A) ध्रुवस्वामिनी (B) प्रेमयोगिनी
(C) कर्पूर मंजरी (D) नीलदेवी
49. (A) ध्रुवस्वामिनी

50. निम्नलिखित पंक्तियों के साथ उनके लेखकों को सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ (i) बालकृष्ण भट्ट
(B) नाद सौन्दर्य से कविता की आयु बढ़ती है (ii) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(C) साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है (iii) प्रतापनारायण मिश्र
(D) आचरण की सभ्यता का यह देश ही निराला है (iv) रामचन्द्र शुक्ल (v) सरदार पूर्णसिंह
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) ii iv i v
(C) ii iii iv v
(D) v i ii iii
50. (B)
(A) मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ (हज़ारी प्रसाद द्विवेदी)
(B) नाद सौन्दर्य से कविता की आयु बढ़ती है (रामचन्द्र शुक्ल)
(C) साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है (बालकृष्ण भट्ट)
(D) आचरण की सभ्यता का यह देश ही निराला है (सरदार पूर्णसिंह)

51. निम्नलिखित कवियों को उनकी पंक्तियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) अज्ञेय (i) बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही
(B) निराला (i i) मुक्त करो नारी को मानव
(C) पन्त (i i i) रूपों में एक अरून्प सदा खिलता है
(D) शमशेर बहादुर सिंह (iv) बान्धो न नाव इस ठाव बन्धु
(v) व्यक्ति का धर्म है तप, करुणा, क्षमा
कूट :
a b c d
(A) (iii) (iv) (ii) (i)
(B) (i) (ii) (iii) (iv)
(C) (ii) (iii) (i) (iv)
(D) (v) (iv) (iii) (ii)
51. (A)
(A) अज्ञेय౼ रूपों में एक अरून्प सदा खिलता है
(B) निराला౼ बान्धो न नाव इस ठाव बन्धु
(C) पन्त౼ मुक्त करो नारी को मानव
(D) शमशेर बहादुर सिंह౼ बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही

52. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) केशव कहि न जाइ, का कहिए (i) सूर
(B) अबिगति कछु कहत न आवै (ii) कबीर
(C) राम भगति अनियारे तीर (iii) जायसी
(D) जोरी लाइ रकत कै लेई (iv) तुलसी (v) मीरा
कूट :
a b c d
(A) i ii ii iv
(B) iv v iii ii
(C) iv i ii iii
(D) ii iii i v
52. (C)
(A) केशव कहि न जाइ, का कहिए (तुलसी)
(B) अबिगति कछु कहत न आवै (सूर)
(C) राम भगति अनियारे तीर (कबीर)
(D) जोरी लाइ रकत कै लेई (जायसी)

53. ‘‘जसोदा ! कहा कहौं हौं बात । तुम्हरे सुत के करतब मो पै कहत कहे नहिं जात।’’ ये किस कवि की पंक्तियां हैं ?
(A) सूरदास (B) चतुर्भुजदास
(C) कुम्भनदास (D) हरिदास
53. (B) चतुर्भुजदास

54. ‘‘यह अभिनव मानव प्रजा सृष्टि
द्वयता में लगी निरन्तर ही वर्णों की करती रहे सृष्टि ।’’
ये काव्य पंक्तियां किस कवि की हैं ?
(A) जयशंकर प्रसाद (B) पंत
(C) महादेवी वर्मा (D) दिनकर
54. (A) जयशंकर प्रसाद

55. इन उक्तियों को उनके आचार्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) शब्दार्थ शरीरं ताबत् काव्यम् (i) भामह
(B) काव्यं ग्राह्यम अलंकारात् (ii) मम्मट
(C) मुख्यार्थहतिर्दोषः (iii) विश्वनाथ
(D) करोति कीर्तिं प्रतिं च साधु काव्य निबन्धनम् (iv) वामन (v) दण्डी
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) v iv ii i
(C) ii iii iv v
(D) v iv iii ii
55. (B)

56. इन स्थापनाओं को उनके विद्वानों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) महान् कवि वही हो सकता है जो साथ में गम्भीर हो (i) टी. एस. इलियट
(B) कविता व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उससे पलायन है (ii) कॉलरिज
(C) काव्य भाषा तथ्यात्मक नहीं, रागात्मक होती है (iii) लांजाइनस
(D) महान् व्यक्तित्व ही महान् विचारों से सम्पन्न होता है (iv) आई॰ ए॰ रिचर्ड्स
(v) ड्राइडन
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) iii ii iv v
(C) v iv iii i
(D) ii i iv iii
56. (B)
(A) महान् कवि वही हो सकता है जो साथ में गम्भीर हो ౼कॉलरिज
(B) कविता व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उससे पलायन है ౼टी. एस. इलियट
(C) काव्य भाषा तथ्यात्मक नहीं, रागात्मक होती है ౼आई॰ ए॰ रिचर्ड्स
(D) महान् व्यक्तित्व ही महान् विचारों से सम्पन्न होता है ౼लांजाइनस

57. निम्नलिखित उदाहरणों को उनके अलंकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) दृग अरुझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिए, दई नई यह रीति
(i) रूपक
(B) चंचल-अंचल सा नीलाम्बर (ii) उत्प्रेक्षा
(C) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ वन बीच गुलाबी रंग (iii) असंगति
(D) अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी (iv) विरोधाभास
(v) उपमा
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) iii v ii i
(C) ii iii iv v
(D) v iv i iii
57. (B)
(A) दृग अरुझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिए, दई नई यह रीति
౼असंगति
(B) चंचल-अंचल सा नीलाम्बर ౼उपमा
(C) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ वन बीच गुलाबी रंग ౼उत्प्रेक्षा
(D) अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी ౼रूपक

58. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) कितना अकेला हूँ मैं, इस समाज में (i) मुक्तिबोध
(B) पिस गया वह भीतरी और बाहरी दो पाटों के बीच (ii) अज्ञेय
(C) वे पत्तर जो रहे हैं, तुम सपने जोड़ रहे हो (iii) नागार्जुन
(D) मैं ही वसन्त का अग्रदूत (iv) रघुवीर सहाय
(v) निराला
कूट :
a b c d
(A) iv i iii v
(B) i ii iii iv
(C) ii iii iv v
(D) v iv iii i
58. (A)
(A) कितना अकेला हूँ मैं, इस समाज में ౼रघुवीर सहाय
(B) पिस गया वह भीतरी और बाहरी दो पाटों के बीच ౼मुक्तिबोध
(C) वे पत्तर जोड़ रहे हैं, तुम सपने जोड़ रहे हो ౼नागार्जुन
(D) मैं ही वसन्त का अग्रदूत ౼निराला

59. ‘‘आगम वेअ पुराणेहि, पाणिअ माण वहन्ति’’ पंक्ति किसकी है ?
(A) सरहपा (B) कण्हपा (C) शबरपा (D) डोंबिपा
59. (B) कण्हपा

60. “संदेसडउ सबित्थरउ पइ मइ कहणु न जाइ।
जे कालांगुलि मूंदडऊ सो बांहडी समाइ।”
इन काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं :
(A) विमलसूरि (B) अद्दहमाण (C) हेमचन्द्र (D) दामोदर भट्ट
60. (B) अद्दहमाण

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