बुधवार, 16 मई 2018

UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-1

UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-1

1. ‘‘नायिका भेद की संकीर्ण सीमा में जितना लोकचित्त आ सकता था, इस काल (रीति) का उतना चित्र निश्चय ही विश्वसनीय और मनोरम है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(1) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (2) नगेन्द्र
(3) भगीरथ मिश्र (4) शिवकुमार मिश्र
1. (3) भगीरथ मिश्र

2. ‘‘मैंने श्रीकृष्णचन्द्र को इस ग्रंथ में एक महापुरुष की भाँति अंकित किया है, ब्रह्म करके नहीं।’’ ౼यह आख्यान किस कवि ने किया है ?
(1) धर्मवीर भारती (2) द्वारिका प्रसाद मिश्र
(3) मैथिलीशरण गुप्त (4) अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध
2. (4) अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध

3. ‘‘दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज जो नहीं कही।’’ ౼यह कथन किस कवि का है ?
(1) प्रसाद (2) मुक्तिबोध
(3) निराला (4) पंत
3. (3) निराला

4. ‘‘भूलकर जब राह, जब जब राह, भटका मैं
तुम्हीं झलके, महाकवि,
सघन तम की आंख बनकर मेरे लिए’’ ౼महाकवि निराला का उपर्युक्त स्तवन किस परवर्ती कवि ने किया है ?
(1) शमशेर बहादुर सिंह (2) रामधारी सिंह दिनकर
(3) धर्मवीर भारती (4) रघुवीर सहाय
(1) शमशेर बहादुर सिंह

5. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) जाके कुटुम्ब सब ढोर ढोबन्त
फिरहिं अजहुं बानारसी आसपासा (i) जायसी
(B) जेई मुख देखा तेइ हँसा
सुना ते आयउ आँसु (ii) सूरदास
(C) हरि हैं राजनीति पढि आए समुझी बात
कहत मधुकर जो समाचार कछु पाए (iii) रैदास
(D) संतन को कहा सीकरी सो काम (iv) नंददास
(v) कुंभनदास
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (iv) (v) (i) (ii)
(2) (iii) (iii) (v) (i)
(3) (iii) (i) (ii) (v)
(4) (i) (ii) (iv) (iii)
5. (3)
(A) जाके कुटुम्ब सब ढोर ढोबन्त
फिरहिं अजहुं बानारसी आसपासा ౼रैदास
(B) जेई मुख देखा तेइ हँसा
सुना ते आयउ आँसु ౼जायसी
(C) हरि हैं राजनीति पढि आए समुझी बात
कहत मधुकर जो समाचार कछु पाए ౼सूरदास
(D) संतन को कहा सीकरी सो काम ౼कुंभनदास

6. ‘‘मोरा जोबना नवेल रा भयो है गुलाल
कासे घर दीनी बकस मोरी माल।
उक्त काव्य-पंक्तियां के रचयिता हैं’’
(A) धर्मदास (B) अमीर ख़ुसरो (C) दरिया साहब (D) यारी साहब
6. (B) अमीर ख़ुसरो

7. ‘‘सखी हौं स्याम रंग रंगी।
देखी बिकाय गई वह मूरति, सूरत माहिं पगी ।’’ ౼ये काव्य-पंक्तियां किसकी हैं?
(A) हितहरिवंश (B) गदाधर भट्ट (C) मीराबाई (D) जीव गोस्वामी
7. (B) गदाधर भट्ट

8. ‘‘तिय सैसव जोबन मिले, भेद न जान्यो जात।
प्रात समय निसि द्योस के डुबो भाव दरसात।’’
इस देाहे में नायिका की किस अवस्था का वर्णन किया गया है?
(A) सद्यः स्नाता (B) वयःसंधि (C) नवोढा (D) मानमृदु
8. (B) वयःसंधि

9. ‘‘जगत् जनायो जिहिं सकल, सो हरि जान्यों नाहिं।
ज्यों आंखिन सब देखियै, आंखि न देखी जाहिं।।’’
उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है?
(A) दृष्टान्त (B) उदाहरण (C) उपमा (D) प्रतिवस्तुपमा
9. (B) उदाहरण

10. ‘‘रचना न तो दर्शन है और न किसी ज्ञानी के प्रौढ मस्तिष्क का चमत्कार। यह तो अन्तततः एक साधारण मनुष्य का शंकाकालु हृदय ही है, जो मस्तिष्क के स्तर पर चढकर बोल रहा है।’’ ౼रामधारी सिंह दिनकर द्वारा कहा गया यह कथन किस काव्य में संबंध में है?
(A) रश्मिरथी (B) उर्वशी (C) कुरुक्षेत्र (D) परशुराम की प्रतीक्षा
10. (C) कुरुक्षेत्र

11. ‘‘उड़ गया गरजता यंत्र-गरुड़
बन बिन्दु, शून्य में पिघल गया साँप।’’ ౼ये पंक्तियाँ अज्ञेय की किस कविता से हैं?
(A) पहचान (B) साँप (C) हरि घास पर क्षण भर (D) हवाई अड्डे पर विदा
11. (D) हवाई अड्डे पर विदा

12. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) हौं सब कबिन्ह केर पच्छिलगा। (i) कबीरदास
(B) कबित्त बिवेक एक नहिं मोरे। (ii) जायसी
(C) प्रभुजी, हौं पतितन कौ टीको। (iii) मलूकदास
(D) अब तो अजपा जपु मन मेरे (iv) तुलसीदास (v) सूरदास
कोड :
a b c d
(A) (ii) (iv) (v) (iii)
(B) (iv) (i) (ii) (v)
(C) (iii) (ii) (iv) (i)
(D) (i) (iv) (v) (ii)
12. (A)
(A) हौं सब कबिन्ह केर पच्छिलगा। (जायसी)
(B) कबित्त बिवेक एक नहिं मोरे। (तुलसीदास)
(C) प्रभुजी, हौं पतितन कौ टीको। (सूरदास)
(D) अब तो अजपा जपु मन मेरे। (कबारदास)

13. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) श्रेय नही कुछ मेरा मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में
वीणा के माध्यम से अपने को मैंने सब कुछ सौंप दिया था। (i) मुक्तिबोध
(B) परम अभिव्यक्ति लगातार घूमती है जग में
पता नहीं जाने कहाँ, जाने कहाँ वह है (ii) दिनकर
(C) पर एक तत्व है बीज रूप स्थित मन में साहस में,
स्वतंत्रता में, नूतन सृजन में (iii) शमशेर बहादुर सिंह
(D) मैं उनका आदर्श जो व्यथा न खोल सकेंगे
पूछेगा जग किन्तु पिता का नाम न बोल सकेंगे। (iv) धर्मवीर भारती (v) अज्ञेय
कोड :
a b c d
(A) (iv) (i) (iv) (ii)
(B) (v) (i) (iii) (ii)
(C) (i) (ii) (iii) (iv)
(D) (iv) (iii) (ii) (vi)
13. (B)
(A) श्रेय नही कुछ मेरा मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में
वीणा के माध्यम से अपने को मैंने सब कुछ सौंप दिया था।
(अज्ञेय, असाध्यवीणा)
(B) परम अभिव्यक्ति लगातार घूमती है जग में
पता नहीं जाने कहाँ, जाने कहाँ वह है । (मुक्तिबोध, अन्धेरे में, भाग 8)
(C) पर एक तत्व है बीज रूप स्थित मन में साहस में,
स्वतंत्रता में, नूतन सृजन में (धर्मवीर भारती, अन्धायुग)
(D) मैं उनका आदर्श जो व्यथा न खोल सकेंगे
पूछेगा जग किन्तु पिता का नाम न बोल सकेंगे। (दिनकर, रश्मिरथी)

14. ‘‘मैं नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जग सुखदाई। राजीव विलोचन भव भय मोचन पाहि-पाहि सरनहिं आई।।’’
౼रामचरित मानस की उक्त चौपाई में व्यक्त विचार किस पात्र के हैं ?
(1) अहल्या (2) शबरी
(3) तारा (4) मंदोदरी
14. (1) अहल्या

15. ‘‘अच्युत् चरन तरंगिगिनी, शिव-सिर मालती माल।
परि न बनायो सुरसरी, कीजो इंजव भाल।’’
౼इस दोहे के रचनाकार का नाम है :
(1) रहीम (2) रसलीन
(3) रसखान (4) रामसहाय
15. (1) रहीम

16. ‘‘लिखन बैठी जाकी सबी गहि-गहि हरब गरूर।
भए न केते जगत के चतुर चितेरे कूर।।’’ ౼इस दोपे में सबी शब्द का अर्थ है :
(1) चित्र (नायिका के समान) (2) काल्पनिक चित्र
(3) आदर्श चित्र (4) मनोनुकूल चित्र
16. (1) चित्र (नायिका के समान)

17. ‘‘कहाँ हो ऐ हमारे प्राण प्यारे। किधर तुम छोड़कर हमको सिधारे।।
बुढ़ापे में यह दुख भी देखना था।। इसको को देखने को मैं बचा था।’’
౼ये काव्य-पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(1) प्रतापनारायण मिश्र (2) अम्बिकादत्त व्यास
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (4) उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी
17. (3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

18. ‘‘फिर परियों के बच्चे से हम सुभग सीप के पंख पसार।
समुद्र पैरते शुचि ज्योत्सना में पकड़ इन्द्र के कर सुकुमार।’’
౼इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :
(1) सुमित्रानन्दन पंत (2) महादेवी वर्मा
(3) निराला (4) प्रसाद
18. (1) सुमित्रानन्दन पंत

19. ‘‘सब का निचोड़ लेकर तुम
सुख से सूखे जीवन में
बरसो प्रभात हिम कण-सा
आँसू बनकर जीवन में।’’
उक्त काव्य-पंक्तियों के रचयिता हैं :
(1) निराला (2) जयशंकर प्रसाद
(3) महादेवी वर्मा (4) पंत
19. (2) जयशंकर प्रसाद

20. ‘‘कहाँ जाऊँ?/हर दिशा में/मृत्यु से भी बहुत आगे की अपरिमित दूरियाँ हैं।’’ ౼कविता की ये पंक्तियाँ कुंवर नारायण की किस रचना से है?
(1) चक्रव्यूह (2) अपने सामने
(3) आत्मजयी (4) परिवेश : हम-तुम
20. (3) आत्मजयी

21. ‘‘वैदिक सूक्तों के गरिमामय उद्गम से लेकर लोकगीतों के महासागर तक जिस अविछिन्न प्रवाह की उपलब्धि होती है, उस भारतीय भावधारा का स्नातक हूँ।’’
उपर्युक्त विचार विद्यानिवास मिश्र ने अपने किस निबंध-संग्रह की भूमिका में लिखे हैं?
(1) देश, धर्म और साहित्य (2) पीपल के बहाने
(3) छितवन की छांह (4) शिरीष की याद आई।
21. (3) छितवन की छांह

22. अज्ञेय ने ‘शेखर’ के संदर्भ में अपने किस निबंध में स्वीकार किया है कि ‘‘ज्याँ क्रिस्तोफ के अनवत आत्मशोध और आत्म-साक्षात्कार का जो चित्र ‘रोलाँ’ ने प्रस्तुत किया है, उससे कुछ अवश्य प्रेरणा मिली ?’’
(1) अद्यतन (2) आत्मनेपद
(3) त्रिशंकु (4) धार और किनारे
22. (2) आत्मनेपद

23. ‘‘आज बस पराजय की बेला में सिद्ध हुआ
झूठी थी सारी अनिवार्यता भविष्य की
केवल कर्म सत्य है
मानव जो करता है, इसी समय
उसी में निहित है भविष्य
युग-युग तक का।’’
౼अंधायुग का उक्त संवाद किस अंक से उद्धृत है ?
(1) कौरव नगरी (2) गांधारी का शाप
(3) प्रभु की मृत्यु (4) पशु का उदय
23. (4) पशु का उदय

24. ‘‘समझदारी आने पर यौवन चला जाता है, जब तक माला गुंथी जाती है फूल कुम्हला जाते हैं।’’
౼जयशंकर प्रसाद कृत ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक का उक्त संवाद किस पात्र द्वारा बोला गया है ?
(1) दाण्ड्यायन (2) चाणक्य
(3) चन्द्रगुप्त (4) सिंहरण
24. (2) चाणक्य

25. ‘‘काव्यशोभायाः कर्तारौ धर्मः गुणाः।’’ ౼यह किस आचार्य की उक्ति है ?
(1) मम्मट (2) वामन
(3) आनन्दवर्द्धन (4) विश्वनाथ
25. (2) वामन

26. जहाँ सामानार्थक विशेषणों से प्रस्तुत के वर्णन द्वारा अप्रस्तुत का बोध कराया जाय, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है ?
(1) समासोक्ति (2) सहोक्ति
(3) विनोक्ति (4) व्यक्तिरेक
26. (1) समासोक्ति

27. ‘‘मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ।’’ ౼यह किस आचार्य की उक्ति है?
(1) महावीर प्रसाद द्विवेदी (2) रामचन्द्र शुक्ल
(3) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (4) नन्ददुलारे वाजपयी
27. (3) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

28. स्वाधीनता प्राप्ति के अवसर पर लिखी गई निम्नलिखित कविता किस कवि की है?
‘‘मुक्त गगन है, मुक्त पवन है, मुक्त सांस गर्वीली।
लांघ सात लांबी सदियों को हुई शृंखला ढीली।
टूटी नहीं कि लगा अभी तक, उपनिवेश का दाग़?
बोल तिरंगे, तुझे उड़ाऊँ या कि जगाऊँ आग?’’
(1) माखनलाल चतुर्वेदी (2) रामधारी सिंह दिनकर
(3) बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (4) सोहनलाल द्विवेदी
28. (1) माखनलाल चतुर्वेदी

29. ‘‘कविता तो कवि की आत्मा का आलोक है, उसके हृदय का रस है, जो बाहर की वस्तु का अवलम्ब लेकर फूट पड़ती है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(1) जयशंकर प्रसाद (2) नरेश मेहता
(3) रामधारी सिंह दिनकर (4) कुंवर नारायण
29. (3) रामधारी सिंह दिनकर

30. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-I सूची-II
(a) जेहि पंखी के नियर होई, करै बिरह की बात। सोई पंखी जाई जरि, तरिवर होई निपात (i) तुलसीदास
(b) हमको सपनेहू में सोच जा दिन तें बिछुरे नन्दनन्दन ता दिन ते यह पोच। (ii) नंददास
(d) जब जीवन को है कपि आस न कोय। कनगुरिया की मुदरी कंगना होय (iii) सूरदास
(d) जिभिया ऐसी बावरी कहि गई सरग-पताल आपुहिं कहि भीतर रही, जूती खात कपाल। (iv) जायसी (v) रहीम
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (iv) ( iii) ( i) (v)
(2) (v) (iv) (ii) (i)
(3) (iii) (v) (iv) (ii)
(4) (ii) ( i) ( iii) ( iv)
30. (1)
(a) जेहि पंखी के नियर होई, करै बिरह की बात। सोई पंखी जाई जरि, तरिवर होई निपात ౼ जायसी
(b) हमको सपनेहू में सोच जा दिन तें बिछुरे नन्दनन्दन ता दिन ते यह पोच। ౼ सूरदास
(c) जब जीवन को है कपि आस न कोय। कनगुरिया की मुदरी कंगना होय ౼ तुलसीदास
(d) जिभिया ऐसी बावरी कहि गई सरग-पताल आपुहिं कहि भीतर रही, जूती खात कपाल। ౼ रहीम

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UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-2


UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-2


31. नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग
खिला हो ज्यों बिजली का फूल, मेघ वन बीच गुलाबी रंग ।
౼इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
(A) उपमा (B) उत्प्रेक्षा (C) रूपक (D) दृष्टान्त
31. (C) रूपक

32. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को सुमेलित कीजिए :
(A) नैया बीच नदिया डूबति जाय (1) रहीम
(B) अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काज (2) कबीर
(C) गुरु सुआ जेइ पंथ दिखावा (3) ख़ुसरो
(D) तबलग ही जीवो भलो देबौ होय न धीम (4) जायसी
(5) मलूकदास
कोड :
a b c d
(A) 5 1 2 3
(B) 2 5 4 1
(C) 2 3 5 1
(D) 2 1 5 4
32. (B)
(A) नैया बीच नदिया डूबति जाय (कबीर)
(B) अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काज (मलूकदास)
(C) गुरु सुआ जेइ पंथ दिखावा (जायसी)
(D) तबलग ही जीवो भलो देबौ होय न धीम (रहीम)

33. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) ये उपमान मैले हो गये हैं (i) अज्ञेय
(B) हम राज्य लिये मरते हैं (ii) बिहारी
(C) बतरस लालच लाल की (iii) मैथिलीशरण गुप्त
(D) भक्तिहिं ज्ञानहिं नहिं कछु भेदा (iv) तुलसीदास (v) पंत

कूट :
a b c d
(A) (v) (i) (ii) (iii)
(B) (i) (iii) (ii) (iv)
(C) (i) (ii) (iii) (iv)
(D) (iv) (v) (i) (ii)
33. (B)
(A) ये उपमान मैले हो गये हैं (अज्ञेय)
(B) हम राज्य लिये मरते हैं (मैथिलीशरण गुप्त)
(C) बतरस लालच लाल की (बिहारी)
(D) भक्तिहिं ज्ञानहिं नहिं कछु भेदा (तुलसीदास)

34. निम्नलिखित गद्य-पंक्तियों को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है (i) प्रेमचन्द
(B) अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन (ii) प्रसाद
(C) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल (iii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(D) मर्द साठे पर पाठे होते हैं (iv) रामचन्द्र शुक्ल
(v) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
कूट :
a b c d
(A) (i) (ii) (iii) (iv)
(B) (v) (i) (ii) (iii)
(C) (iv) (ii) (iii) (i)
(D) (i) (iv) (v) (iii)
34. (C)
(A) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है (रामचन्द्र शुक्ल)
(B) अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन (प्रसाद)
(C) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
(D) मर्द साठे पर पाठे होते हैं (प्रेमचन्द)

35. ‘‘नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी’’ ౼ये काव्य-पंक्तियां किस कवि की हैं ?
(A) पद्माकर
(B) मतिराम
(C) घनानन्द
(D) देव
35. (A) पद्माकर

36. ‘‘सखि वे मुझसे कहकर जाते’’ ౼किस कवि काव्य-पंक्ति हैं ?
(A) सियारामशरण गुप्त
(B) मैथिलीशरण गुप्त
(C) अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध
(D) जगदीश गुप्त
36. (B) मैथिलीशरण गुप्त

37. सुमेलित कीजिए :
(A) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल (i) नानकदेव
(B) प्रभुजी मेरे अवगुण चित्त न धरो (ii) कबीर
(C) अब लौं नसानी अब न नसै हौं (iii) सूरदास
(D) अव्वल अल्लह नूर उपाया क़ुदरत के सब बन्दे (iv) तुलसीदास
(v) मीराबाई
कूट :
a b c d
(A) (v) (iii) (iv) (i)
(B) (iv) (ii) (iii) (i)
(C) (iii) (iv) (v) (i)
(D) (ii) (iii) (iv) (v)
37. (A)
(A) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल (मीराबाई)
(B) प्रभुजी मेरे अवगुण चित्त न धरो (सूरदास)
(C) अब लौं नसानी अब न नसै हौं (तुलसीदास)
(D) अव्वल अल्लह नूर उपाया क़ुदरत के सब बन्दे (कबीर)

38. ‘‘आवत जात पनहियां टूटी बिसरि गयो हरि नाम’’ ౼यह पंक्ति किस कवि की है ?
(A) चतुर्भुजदास
(B) सूरदास
(C) कुंभनदास
(D) नन्ददास
38. (C) कुंभनदास

39. ‘‘कुन्दन को रंग फीको लगै, झलकै अति अंगनि चारु गौराई’’ ౼यह काव्य-पंक्ति किस कवि की है ?
(A) भूषण
(B) बिहारी
(C) देव
(D) मतिराम
39. (D) मतिराम

40. ‘‘आह, वेदना मिली विदाई’’ ౼किस नाटक के गीत की पंक्ति है?
(A) अजातशत्रु
(B) चन्द्रगुप्त
(C) स्कन्दगुप्त
(D) धवस्वामिनी
40. (C) स्कन्दगुप्त

41. ‘‘काव्यानुभूति की जटिलता चित्तवृत्तियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि संवादी-विसंवादी वृत्तियों के द्वन्द्व पर आधारित है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(A) रामचन्द्र शुक्ल
(B) नामवर सिंह
(C) नन्ददुलारे वाजपेयी
(D) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
41. (A) रामचन्द्र शुक्ल

42. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) धूप का तन दीप सी मैं (i) निराला
(B) मधुप गुनगुनाकर कह जाता (ii) पन्त
(C) स्नेह निर्झर बह गया है (iii) नरेन्द्र शर्मा
(D) हाय, मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन (iv) महादेवी
(v) प्रसाद
कूट :
a b c d
(A) (ii) (i) (iii) (iv)
(B) (iv) (v) (i) (ii)
(C) (v) (iii) (iv) (ii)
(D) (v) (ii) (i) (iii)
42. (B)
(A) धूप का तन दीप सी मैं (महादेवी)
(B) मधुप गुनगुनाकर कह जाता (प्रसाद)
(C) स्नेह निर्झर बह गया है (निराला)
(D) हाय, मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन (पन्त)

43. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) दोनों ओर प्रेम पलता है (1) प्रसाद
(B) धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध (2) तुलसीदास
(C) परहित सरिस धर्म नहीं भाई (3) निराला
(D) बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं (4) मैथिलीशरण गुप्त
(5) महादेवी
कूट :
a b c d
(A) (ii) (i) (v) (iv)
(B) (v) (ii) (i) (iv)
(C) (iv) (iii) (ii) (v)
(D) (ii) (ii) (iv) (i)
43. (C)
(A) दोनों ओर प्रेम पलता है (मैथिलीशरण गुप्त)
(B) धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध (निराला)
(C) परहित सरिस धर्म नहीं भाई (तुलसीदास)
(D) बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं (महादेवी)

44. सुमेलित कीजिए :
(A) शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (1) मम्मट
(B) तददौषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (2) विश्वनाथ
(C) रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्द काव्यम् (3) भामह
(D) वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (4) आनन्दवर्द्धन
(5) पंडितराज जगन्नाथ
कूट :
a b c d
(A) (v) (iv) (ii) (iii)
(B) (iii) (i) (v) (ii)
(C) (ii) (iii) (vi) (v)
(D) (i) (iv) (v) (ii)
44. (B)
(A) शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (भामह)
(B) तददौषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (मम्मट)
(C) रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्द काव्यम् (पंडितराज जगन्नाथ)
(D) वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (विश्वनाथ)

45. ‘‘प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी’’ ౼यह किसकी पंक्ति है ?
(A) सन्त दादूदयल
(B) रैदास
(C) सन्त पापा
(D) सन्त पल्टूदास
45. (B) रैदास

46. निम्नलिखित पंक्तियों और कवियों का सुमेलन कीजिए :
(A) कनक कदलि पर सिंह समारल ता पर मेरु समाने (1) घनानन्द
(B) नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी (2) रसखान
(C) अति सूधो सनेह को मारग है (3) विद्यापति
(D) मोर पखा सिर ऊपर राखि हों, कुंज की माल गले पहिरौगी (4) मतिराम
(5) पद्माकर
कूट :
a b c d
(A) (ii) (iii) (i) (iv)
(B) (iii) (v) (i) (ii)
(C) (v) (ii) (i) (iii)
(D) (iv) (iii) (ii) (v)
46. (B)
(A) कनक कदलि पर सिंह समारल ता पर मेरु समाने (विद्यापति)
(B) नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी (पद्माकर)
(C) अति सूधो सनेह को मारग है (घनानन्द)
(D) मोर पखा सिर ऊपर राखि हों, कुंज की माल गले पहिरौगी (रसखान)

47. ‘‘उज्ज्वल वरदान चेतना का, सौन्दर्य जिसे सब कहते हैं’’ ౼यह पंक्ति किस सर्ग से है ?
(A) श्रद्धा (B) आशा
(C) लज्जा (D) आनन्द
47. (C) लज्जा

48. ‘‘सुनिहै कथा कौन निर्गुन को, पचि पचि बात बनावत, सगुन सुमेरू प्रगट देखियत, तुम तृण की ओट दुरावत’’ ౼ये पंक्तियाँ किसकी हैं?
(A) सूरदास (B) नन्ददास
(C) कृष्णदास (D) परमानन्द दास
48. (A) सूरदास

49. ‘‘कितना अनुभूतिपूर्ण था वह एक क्षण का आलिंगन ?’’ ౼ यह कथन किस रचना से है ?
(A) ध्रुवस्वामिनी (B) प्रेमयोगिनी
(C) कर्पूर मंजरी (D) नीलदेवी
49. (A) ध्रुवस्वामिनी

50. निम्नलिखित पंक्तियों के साथ उनके लेखकों को सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ (i) बालकृष्ण भट्ट
(B) नाद सौन्दर्य से कविता की आयु बढ़ती है (ii) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(C) साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है (iii) प्रतापनारायण मिश्र
(D) आचरण की सभ्यता का यह देश ही निराला है (iv) रामचन्द्र शुक्ल (v) सरदार पूर्णसिंह
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) ii iv i v
(C) ii iii iv v
(D) v i ii iii
50. (B)
(A) मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ (हज़ारी प्रसाद द्विवेदी)
(B) नाद सौन्दर्य से कविता की आयु बढ़ती है (रामचन्द्र शुक्ल)
(C) साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है (बालकृष्ण भट्ट)
(D) आचरण की सभ्यता का यह देश ही निराला है (सरदार पूर्णसिंह)

51. निम्नलिखित कवियों को उनकी पंक्तियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) अज्ञेय (i) बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही
(B) निराला (i i) मुक्त करो नारी को मानव
(C) पन्त (i i i) रूपों में एक अरून्प सदा खिलता है
(D) शमशेर बहादुर सिंह (iv) बान्धो न नाव इस ठाव बन्धु
(v) व्यक्ति का धर्म है तप, करुणा, क्षमा
कूट :
a b c d
(A) (iii) (iv) (ii) (i)
(B) (i) (ii) (iii) (iv)
(C) (ii) (iii) (i) (iv)
(D) (v) (iv) (iii) (ii)
51. (A)
(A) अज्ञेय౼ रूपों में एक अरून्प सदा खिलता है
(B) निराला౼ बान्धो न नाव इस ठाव बन्धु
(C) पन्त౼ मुक्त करो नारी को मानव
(D) शमशेर बहादुर सिंह౼ बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही

52. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) केशव कहि न जाइ, का कहिए (i) सूर
(B) अबिगति कछु कहत न आवै (ii) कबीर
(C) राम भगति अनियारे तीर (iii) जायसी
(D) जोरी लाइ रकत कै लेई (iv) तुलसी (v) मीरा
कूट :
a b c d
(A) i ii ii iv
(B) iv v iii ii
(C) iv i ii iii
(D) ii iii i v
52. (C)
(A) केशव कहि न जाइ, का कहिए (तुलसी)
(B) अबिगति कछु कहत न आवै (सूर)
(C) राम भगति अनियारे तीर (कबीर)
(D) जोरी लाइ रकत कै लेई (जायसी)

53. ‘‘जसोदा ! कहा कहौं हौं बात । तुम्हरे सुत के करतब मो पै कहत कहे नहिं जात।’’ ये किस कवि की पंक्तियां हैं ?
(A) सूरदास (B) चतुर्भुजदास
(C) कुम्भनदास (D) हरिदास
53. (B) चतुर्भुजदास

54. ‘‘यह अभिनव मानव प्रजा सृष्टि
द्वयता में लगी निरन्तर ही वर्णों की करती रहे सृष्टि ।’’
ये काव्य पंक्तियां किस कवि की हैं ?
(A) जयशंकर प्रसाद (B) पंत
(C) महादेवी वर्मा (D) दिनकर
54. (A) जयशंकर प्रसाद

55. इन उक्तियों को उनके आचार्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) शब्दार्थ शरीरं ताबत् काव्यम् (i) भामह
(B) काव्यं ग्राह्यम अलंकारात् (ii) मम्मट
(C) मुख्यार्थहतिर्दोषः (iii) विश्वनाथ
(D) करोति कीर्तिं प्रतिं च साधु काव्य निबन्धनम् (iv) वामन (v) दण्डी
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) v iv ii i
(C) ii iii iv v
(D) v iv iii ii
55. (B)

56. इन स्थापनाओं को उनके विद्वानों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) महान् कवि वही हो सकता है जो साथ में गम्भीर हो (i) टी. एस. इलियट
(B) कविता व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उससे पलायन है (ii) कॉलरिज
(C) काव्य भाषा तथ्यात्मक नहीं, रागात्मक होती है (iii) लांजाइनस
(D) महान् व्यक्तित्व ही महान् विचारों से सम्पन्न होता है (iv) आई॰ ए॰ रिचर्ड्स
(v) ड्राइडन
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) iii ii iv v
(C) v iv iii i
(D) ii i iv iii
56. (B)
(A) महान् कवि वही हो सकता है जो साथ में गम्भीर हो ౼कॉलरिज
(B) कविता व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उससे पलायन है ౼टी. एस. इलियट
(C) काव्य भाषा तथ्यात्मक नहीं, रागात्मक होती है ౼आई॰ ए॰ रिचर्ड्स
(D) महान् व्यक्तित्व ही महान् विचारों से सम्पन्न होता है ౼लांजाइनस

57. निम्नलिखित उदाहरणों को उनके अलंकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) दृग अरुझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिए, दई नई यह रीति
(i) रूपक
(B) चंचल-अंचल सा नीलाम्बर (ii) उत्प्रेक्षा
(C) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ वन बीच गुलाबी रंग (iii) असंगति
(D) अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी (iv) विरोधाभास
(v) उपमा
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) iii v ii i
(C) ii iii iv v
(D) v iv i iii
57. (B)
(A) दृग अरुझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिए, दई नई यह रीति
౼असंगति
(B) चंचल-अंचल सा नीलाम्बर ౼उपमा
(C) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ वन बीच गुलाबी रंग ౼उत्प्रेक्षा
(D) अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी ౼रूपक

58. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) कितना अकेला हूँ मैं, इस समाज में (i) मुक्तिबोध
(B) पिस गया वह भीतरी और बाहरी दो पाटों के बीच (ii) अज्ञेय
(C) वे पत्तर जो रहे हैं, तुम सपने जोड़ रहे हो (iii) नागार्जुन
(D) मैं ही वसन्त का अग्रदूत (iv) रघुवीर सहाय
(v) निराला
कूट :
a b c d
(A) iv i iii v
(B) i ii iii iv
(C) ii iii iv v
(D) v iv iii i
58. (A)
(A) कितना अकेला हूँ मैं, इस समाज में ౼रघुवीर सहाय
(B) पिस गया वह भीतरी और बाहरी दो पाटों के बीच ౼मुक्तिबोध
(C) वे पत्तर जोड़ रहे हैं, तुम सपने जोड़ रहे हो ౼नागार्जुन
(D) मैं ही वसन्त का अग्रदूत ౼निराला

59. ‘‘आगम वेअ पुराणेहि, पाणिअ माण वहन्ति’’ पंक्ति किसकी है ?
(A) सरहपा (B) कण्हपा (C) शबरपा (D) डोंबिपा
59. (B) कण्हपा

60. “संदेसडउ सबित्थरउ पइ मइ कहणु न जाइ।
जे कालांगुलि मूंदडऊ सो बांहडी समाइ।”
इन काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं :
(A) विमलसूरि (B) अद्दहमाण (C) हेमचन्द्र (D) दामोदर भट्ट
60. (B) अद्दहमाण

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बुधवार, 24 जनवरी 2018

दूधनाथ सिंह की रचनाएँ

दूधनाथ सिंह की रचनाएँ
जन्म : 17 अक्टूबर 1936 , सोबंथा गाँव, (बलिया, उत्तर प्रदेश)
निधन : 11 जनवरी, 2018 ई. (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश)
जनवादी साहित्यकार दूधनाथ सिंह ने अपनी कहानियों के माध्यम से साठोत्तरी भारत के पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक एवं मनोवैज्ञानिक सभी क्षेत्रों में उत्पन्न विसंगतियों एवं विद्रूपताओं को चुनौती दी।
यम-गाथा नाटक मिथक पर आधारित है और इसका कथानक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों - साममन्तवाद, सत्ता की राजनीति, हिंसा, अन्याय, सामाजिक-भेदभाव और नस्लवाद पर सवाल पर खड़े करता है।
साठोत्तरी कहानी और अकहानी के सूत्रधारों में से
दूधनाथ सिंह उन कथाकारों में शामिल हैं जिन्होंने नई कहानी आंदोलन को चुनौती दी और साठोत्तरी कहानी आंदोलन का सूत्रपात किया। 'हिन्दी के चार यार' के रूप में प्रसिद्ध में से एक। अन्य तीन हैं - ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह और रवीन्द्र कालिया।
उपन्यास : आखिरी कलाम (2003 ई.), बाबरी मस्जिद-विध्वंस पर यात्रा-वृतान्त शैली में रचित उपन्यास ।
कहानी-संग्रह : सपाट चेहरे वाला आदमी (1967 ई.), सुखान्त (1971 ई.), प्रेमकथा का अन्त न कोई, पहला क़दम (1976 ई.) माई का शोकगीत (1992 ई.), नमो अन्धकारम् (1998 ई.), धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे (2002 ई.), निष्कासन (2002 ई.), तू फू (2011 ई.), जलमुर्गिर्यों का शिकार, कथा-समग्र।
चर्चित कहानियाँ : विजेता, कबन्ध, रीछ, सुखान्त, प्रतिशोध इत्यादि।
कविता-संग्रह : अगली शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू, सुरंग से लौटते हुए (लंबी कविता), तुम्हारे लिए, एक अनाम कवि की कविताएँ।
नाटक : यमगाथा (1990 ई.), पौराणिक गाथा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। पुरुरवा, उर्वशी और इन्द्र इसके मुख्यपात्र हैं।
आलोचना : निराला : आत्महंता आस्था, महादेवी, मुक्तिबोध : साहित्य में नई प्रवृत्तियाँ, अन्तःकरण का आयतन (मुक्तिबोध की कविता पर एक पुस्तक)।
संस्मरण : लौट आ ओ धार (1995 ई.), सबको अमर देखना चाहता हूँ।
साक्षात्कार : कहा-सुनी (2005 ई.), इसमें दूधनाथ सिंह के चार साक्षात्कार और चार निबन्ध (महाजनी सभ्यता और आज की दुनिया, सुमित्रानन्दन पन्त का अन्तर्गमन, समकालीन हिन्दी कविता में रीतिवाद तथा कहानी का झूठा सच) संकलित हैं।
सम्पादन : तारापथ (सुमित्रानंदन पंत की कविताओं का चयन), एक शमशेर भी है, दो शरण (निराला की भक्ति-कविताएँ), भुवनेश्वर-समग्र, पक्षधर (पत्रिका – आपात काल के दौरान एक अंक का सम्पादन, जिसे सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया)।
सम्मान : भारत भारती सम्मान, भारतेंदु सम्मान, शरद जोशी स्मृति सम्मान, कथाक्रम सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान।

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मंगलवार, 23 जनवरी 2018

प्रसाद के नाटक स्कन्दगुप्त के पात्र

प्रसाद के नाटक स्कन्दगुप्त के पात्र
पुरुष-पात्र
स्कन्दगुप्त : युवराज (विक्रमादित्य)
कुमारगुप्त : मगध का सम्राट्
गोविन्दगुप्त : कुमारगुप्त का भाई
पुरगुप्त : कुमारगुप्त का छोटा पुत्र
पर्णदत्त : मगध का महानायक
चक्रपालित : पर्णदत्त का पुत्र
बन्धुवर्म्मा : मालव का राजा
भीमवर्म्मा : बन्धुवर्म्मा का भाई
मातृगुप्त : काव्यकर्ता कालिदास
प्रपंचबुद्धि : बौद्ध कापालिक
शर्वनाग : अंर्वेद का विषयपति
धातुसेन (कुमारदास) : कुमारदास के प्रछन्न रूप में सिंहल का राजकुमार
भटार्क : नवीन महाबलाधिकृत
पृथ्वीसेन : मंत्री कुमारात्य
खिंगिल : हूण आक्रमणकारी
मुद्गल : विदूषक
प्रख्यातकीर्ति : लंकराज कुल का श्रमण, महाबोधि-विहार का स्थविर
नारी-पात्र
देवकी : कुमारगुप्त की बड़ी रानी
अनन्तदेवी : कुमारगुप्त की छोटी रानी, पुरगुप्त की माता
जयमाला : बन्धुवर्मा की स्त्री, मालव की रानी
देवसेना : बन्धुवर्म्मा की बहिन
विजया : मालव के धनकुबेर की कन्या
कमला : भटार्क की जननी
रामा : शर्वनाग की स्त्री
मालिनी : मातृगुप्त की प्रणयिनी
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प्रसाद के नाटक चन्द्रगुप्त के पात्र : Hindi Sahitya Vimarsh

प्रसाद के नाटक चन्द्रगुप्त के पात्र  : Hindi Sahitya Vimarsh

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पुरुष-पात्र
चाणक्य (विष्णुगुप्त)  :  मौर्य्य साम्राज्य का निर्माता
चन्द्रगुप्त  :  मौर्य्य-सम्राट्
नन्द  :  मगध-सम्राट्
राक्षस  :  मगध का अमात्य
वररुचि (कात्यायन)  :  मगध का अमात्य
शकटार  :  मगध का मंत्री
आम्भीक  :  तक्षशिला का राजकुमार
सिंहरण  :  मालव गणमुख्य का कुमार
पर्वतेश्वर :  पंजाब का राजा (पोरस)
सिकन्दर : ग्रीक विजेता
फिलिप्स : सिकन्दर का क्षत्रप
मौर्य्य-सेनापति : चन्द्रगुप्त का पिता
एनीसाक्रीटीज : सिकन्दर का सहचर
देवबल, नागदत्त, गणमुख्य : मालव गणतंत्र के पदाधिकारी
साइबर्टियस, मेगास्थनीज : यवन दूत
गान्धार-नरेश : आम्भीक का पिता
सिल्यूकस : सिकन्दर का सेनापति
दाण्ड्यायन : एक तपस्वी
नारी-पात्र
अलका : तक्षशिला की राजकुमारी
सुवासिनी : शकटार की कन्या
कल्याणी : मगध राजकुमारी
नीला, लीला : कल्याणी की सहेलियाँ
मालविका : सिन्धु देश की राजक्मारी
कार्नेलिया : सिल्यूकस की कन्या
मौर्य्य-पत्नी : चन्द्रगुप्त की माता
एलिस : कार्नेलिया की सहेली

प्रसाद के नाटक अजातशत्रु के पात्र

प्रसाद के नाटक अजातशत्रु के पात्र
पुरुष-पात्र
बिम्बिसार : मगध का सम्राट्
अजातशत्रु (कुणीक) : मगध का राजकुमार
उदयन : कौशाम्बी का राजा, मगध सम्राट् का जामाता
प्रसेनजित् : कोसल का राजा
विरुद्धक (शैलेन्द्र) : कोसल का राजकुमार
गौतम : बुद्धदेव
सारिपुत्र : सद्धर्म के आचार्य
आनन्द : गौतम के शिष्य
देवदत्त (भिक्षु) : गौतम बुद्ध का प्रतिद्वन्द्वी
समुद्रदत्त : देवदत्त का शिष्य
जीवक : मगध का राजवैद्य
वसन्तक : उदयन का विदूषक
बन्धुल : कोसल का सेनापति
सुदत्त : कोसल का कोषाध्यक्ष
दीर्घकारायण : सेनापति बन्धुल का भांजा, सहकारी सेनापति
लुब्धक : शिकारी
(काशी का दण्डनायक, अमात्य, दूत, दौवारिक और अनुचरगण)
नारी-पात्र
वासवी : मगध-सम्राट् की बड़ी रानी
छलना : मगध-सम्राट् की छोटी रानी और राजमाता
पद्मावती : मगध की राजकुमारी
मागन्धी (श्यामा) : आम्रपाली
वासवदत्ता : उज्जयिनी की राजकुमारी
शक्तिमती (महामाया) : शाक्यकुमारी, कोसल की रानी
मल्लिका : सेनापति बन्धुल की पत्नी
बाजिरा : कोसल की राजकुमारी
नवीना : सेविका
(विजया, सरला, कंचुकी, दासी, नर्त्तकी इत्यादि)
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बुधवार, 10 जनवरी 2018