बुधवार, 11 मार्च 2020

प्रश्नोत्तरी-3

प्रश्नोत्तरी-3

प्रश्नोत्तरी-3



1. व्यंग्यार्थ यदि वाच्यार्थ से सुन्दर है, तो उसे कहा जाता है :
(1) वक्रोक्ति काव्य
(2) ध्वनि काव्य
(3) गुणीभूत व्यंग्य
(4) गद्य काव्य
Ans : (2) ध्वनि काव्य

2. इन में से कौन सी रचना रामविलास शर्मा की है?
(1) प्रगति और परम्परा
(2) भाषा और समाज
(3) आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण
4) इनमें से सभी।
 Ans : (4) इनमें से सभी 

27 3. ‘#कृष्णायनकिस विधा की रचना है ?
(A) नाटक (B) महाकाव्य (C) उपन्यास (D) खण्डकाव्य

4. #निम्नलिखित में से कौन भारतेन्दु का परवर्ती गद्यकार है ?
(A) प्रतापनारायण मिश्र             (B) राज लक्ष्मण सिंह
(C) राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द      (D) श्रद्धारम फिल्लौरी

5. #निम्नलिखित में से कौन कालिदास के माघदूत का अनुवादक नहीं है ?
(A) लाला सीताराम (B) हज़ारीप्रसाद (C) मोहन राकेश (D) नागार्जुन

6. #निम्नलिखित में से कौन नाटक श्रीनिवासदास का नहीं है ?
(A) संयोगिता स्वयंवर (B) महाराणा प्रताप (C) तप्ता संवरण (D) रणधीर प्रेममोहिनी

7. ‘#भाग्यवतीकिस प्रकार का उपन्यास है ?
(A) ऐतिहासिक (B) मनोविश्लेषणात्मक (C) तिलस्मी-ऐयारी (D) सामाजिक

8. #खड़ीबोली में लिखित प्रथम महाकाव्य कोन-सा है ?
(A) लोकायतन (B) साकेत (C) प्रियप्रवास (D) कामायनी

9.. ‘#भारत भारती का रचनाकाल है
(A) सन् 1909 ई.(B) सन् 1910 ई. (C) सन् 1911 ई. (D) सन् 1912 ई.

10. ‘#साधारणीकरण और व्यक्ति वैचित्र्यवादकिसका निबन्ध है ?
(A) रामचन्द्र शुक्ल    (B) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(C) रामविलास शर्मा   (D) नन्ददुलारे वाजपेयी

11. '#इस करुणा कलित हृदय में
अब विकल रागिनी बजती
क्यों हाहाकार स्वर में
वेदना असीम गरजती' इन काव्य-पंक्तियों के कवि हैं :
(1) निराला (2) हरिवंशराय बच्चन (3) जयशंकर प्रसाद (4) महादेवी वर्मा

12. ‘#रंगदर्शनके लेखक हैं :
(A) सीताराम चतुर्वेदी (B) बलवन्त गार्गी (C) नेमिचन्द जैन (D) सुरेश अवस्थी

13. ‘#हिन्दी जातिकी अवधारणा के प्रवर्तक हैं :
(A) रामचन्द्र शुक्ल (B) रामविलास शर्मा (C) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (D) नगेन्द्र

14. #निम्नलिखित में से गाँधीवादी साहित्यकार नहीं है :
(A) उपेन्द्रनाथ अश्क (B) प्रेमचन्द (C) विष्णु प्रभाकर (D) जैनेन्द्र

15. #कुन्तक ने वक्रोक्ति के कितने प्रधान भेद माने हैं ?
(A) सात (B) चार (C) छह (D) दो

16. #प्रतीकवादी आन्दोलन का उदय कहाँ हुआ ?
(A) जर्मनी में (B) फ्रान्स में (C) इंग्लैड में (D) स्वीडन में

17. #कालक्रमानुसार लल्लूलाल जी की रचनाओ का सही अनुक्रम है :
(A) ब्रजभाषा व्याकरण, लाल चन्द्रिका, प्रेमसागर, सिंहासन बत्तीसी
(B) प्रेमसागर, ब्रजभाषा व्याकरण, सिंहासन बत्तीसी, लाल चन्द्रिका
(C) लाल चन्द्रिका, प्रेमसागर, सिंहासन बत्तीसी, ब्रजभाषा व्याकरण
(D) सिंहासन बत्तीसी, लाल चन्द्रिका, प्रेमसागर, ब्रजभाषा व्याकरण

18. #जीवनकाल के क्रमानुसार निम्नाकित कवियों का सही अनुक्रम है :
(A) जगन्नाथदास रत्नाकर, रामनरेश त्रिपाठी, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला 
(B) रामनरेश त्रिपाठी, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद, जगन्नाथदास रत्नाकर, जगन्नाथदास रत्नाकर
(C) सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद, रामनरेश त्रिपाठी, जगन्नाथदास रत्नाकर
(D) जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, रामनरेश त्रिपाठी, जगन्नाथदास रत्नाकर
 
19. #जैनेन्द्र कुमार के निम्नलिखित उपन्यासों का प्रकाशन काल के क्रम से सही अनुक्रम है :
(A) सुनीता, दशार्क, परख, कल्याणी
(B) कल्याणी, परख, दशार्क, सुनीता 
(C) परख, सुनीता, कल्याणी, दशार्क
(D) दशार्क, परख, सुनीता, कल्याणी

20. #जीवनकाल के क्रम से संस्कृत-काव्यशास्त्र के निम्नांकित आचार्यों का सही अनुक्रम है :
(A) भरतमुनि, शंकुक, भट्टनायक, भट्ट लोल्लट
(B) भट्टनायक, भरतमुनि, भट्ट लोल्लट, शंकुक
(C) भरतमुनि, भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्टनायक
(D) शंकुक, भट्ट लोल्लट, भरतमुनि, भट्टनायक

21. #प्रकाशन के अनुसार निम्नलिखित आंचलिक उपन्यासों का सही अनुक्रम है :
(A) बलचनमा, मैला आंचल, देहाती दुनिया, सागर लहरें और मनुष्य
(B) मैला आंचल, सागर लहरें और मनुष्य, बलचनमा, देहाती दुनिया
(C) सागर लहरें और मनुष्य, देहाती दुनिया, मैला आंचल, बलचनमा
(D) देहाती दुनिया, बलचनमा, मैला आंचल, सागर लहरें और मनुष्य

22. #प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नांकित पत्र-संग्रहों का सही अनुक्रम है :
(A) चिट्ठी-पत्री, फाइल-प्रोफाइल, दो पत्र बच्चन के नाम, प्रसाद के नाम पत्र
(B) फाइल-प्रोफाइल, प्रसाद के नाम पत्र, चिट्ठी-पत्री, दो पत्र बच्चन के नाम,
(C) प्रसाद के नाम पत्र, दो पत्र बच्चन के नाम, चिट्ठी-पत्री, फाइल-प्रोफाइल

(D) दो पत्र बच्चन के नाम, फाइल-प्रोफाइल, चिट्ठी-पत्री, प्रसाद के नाम पत्र


23. #प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नांकित साक्षात्कारों का सही अनुक्रम है :
(A) रत्नाकर स बातचीत, मैं उनसे मिला, अपरोक्ष, बातों बातों में 
(B) मैं उनसे मिला, अपरोक्ष, रत्नाकर स बातचीत, बातों बातों में
(C) बातों बातों में, रत्नाकर स बातचीत, अपरोक्ष, मैं उनसे मिला
(D) अपरोक्ष, बातों बातों में, मैं उनसे मिला, रत्नाकर स बातचीत

24. #प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नांकित रिपोर्ताजों का सही अनुक्रम है :
(A) वे तो लड़ेंगे हज़ारों साल, ऋणा जल-धन जल, तूफ़ानों के बीच, युद्ध यात्रा  
(B) तूफ़ानों के बीच, वे तो लड़ेंगे हज़ारों साल, युद्ध यात्रा, ऋणा जल-धन जल
(C) तूफ़ानों के बीच, ऋणा जल-धन जल, युद्ध यात्रा, वे तो लड़ेंगे हज़ारों साल
(D) वे तो लड़ेंगे हज़ारों साल, तूफ़ानों के बीच, ऋणा जल-धन जल, युद्ध यात्रा

4925. #सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की निम्नांकित रचनाओं का प्रकाशन वर्ष के अनुसार सही अनुक्रम है 
(A) अनामिका, तलसीदास, अपरा, जूही की कली
(B) जूही की कली, अपरा, तलसीदास, अनामिका
(C) अपरा, तलसीदास, जूही की कली, अनामिका
(D) जूही की कली, अनामिका, तलसीदास, अपरा
Ans :
3 B  4 A   5 C  6 B  7 D  8 C  9 D  10 A   11 C   12 C   13 B   14 A   15 C  16 B

17 B  18 A  19 C  20 C   21 D   22 A   23 A   24 B   25 D  

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

हिंदी भाषा और साहित्य प्रश्नोत्तरी (आचार्य रामचंद्र शुक्ल पर विशेष)-2


 प्रश्नोत्तरी-10 (हिंदी भाषा और साहित्य  आचार्य रामचंद्र शुक्ल पर विशेष)


1. आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म कहाँ हुआ था?
(1) बस्ती (उत्तर प्रदेश) (2) वाराणसी (उत्तर प्रदेश)  (3) इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) (4) पटना (बिहार)
 (1) बस्ती (उत्तर प्रदेश)
2. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने आदिकाल को क्या नाम दिया है?
(1) वीरगाथा काल (2) अलंकृत काल (3) चारणकाल (4) वीरकाल
2. (1) वीरगाथा काल
3. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार वीरगाथा काल की समयावधि है :
 (1) संवत् 800-1000 (2) संवत् 950-1300 (3) संवत् 1000-1000 (4) संवत् 1050 - 1375
3. (4) संवत् 1050 - 1375
4. हिंदी साहित्य के इतिहास में वीरगाथा काल को कहा जाता है :
(1) आदिकाल (2) भक्ति काल (3) रीति काल (4) आधुनिक काल
4. (1) आदिकाल
5. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार पूर्व मध्य काल को कहा जाता है :
(1) आदिकाल (2) भक्ति काल (3) रीति काल (4) आधुनिक काल
5. (2) भक्ति काल
6. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार पूर्व मध्य काल (भक्ति काल) की अवधि है :
 (1) संवत् 1050 – 1375 (2) संवत् 1375-1700 (3) संवत् 1700-1900 (4) संवत् 1900 – 1975
6. (2) संवत् 1375-1700
7. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार पूर्व मध्य काल (भक्ति काल) की समयावधि है :
 (1) संवत् 1050 – 1375 (2) संवत् 1375-1700 (3) संवत् 1700-1900 (4) संवत् 1900 – 1975
7. (2) संवत् 1375-1700
8. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार उत्तर मध्यकाल (रीति काल) की समयावधि है :
(1) संवत् 1050 –1375 (2) संवत् 1375-1700 (3) संवत् 1700-1900 (4) संवत् 1900 – 1975
8. (3) संवत् 1700-1900
9. ठाकुर शिवसिंह सेंगर कृत शिवसिंह सरोज को आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा है :
(1) वृत्तसंग्रह (2) कविवृत्त-संग्रह (3) व्यंग्य-संग्रह (4) काव्य-संग्रह
 9. (1) वृत्तसंग्रह
10. डॉक्टर ग्रियर्सन रचित 'मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑव नार्दर्न हिंदुस्तान'  को आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा है :
(1) वृत्त-संग्रह (2) कविवृत्त-संग्रह (3) निबंध-संग्रह (4) काव्य-संग्रह
10. (2) कविवृत्त-संग्रह

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बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

बालकृष्ण शर्मा नवीन का रचनाएँ (कालक्रमानुसार)


बालकृष्ण शर्मा नवीन का रचनाएँ (कालक्रमानुसार)

(जन्म : 8 दिसंबर 1897-29 अप्रैल 1960 ई., ग्वालियर राज्य के भवाना ग्राम में)

राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि, प्रेम और मस्तीपरक काव्य के अग्रदूत, हालावाद के आदि प्रवर्तक।
इनकी प्रथम कहानी संतू (1918 ई.) सरस्वती में प्रकाशित हुई।
सात काव्य-संग्रह :
कुंकुम (1936 ई.), अपलक (1951 ई.), रश्मिरेखा (1952 ई.), क्वासी (1952 ई.), विनोबा स्तवन (1955 ई.), उर्मिला (1957 ई., खंडकाव्य, यह छः सर्गों में विभक्त, उर्मिला के जन्म से लेकर लक्ष्मण से पुनर्मिलन तक की कथा वर्णित, लक्ष्मण-पत्नी उर्मिला का उज्ज्वल चरित्र-चित्रण),  प्रार्णव (गणेशशंकर विद्यार्थी के बलिदान पर लिखित अप्रकाशित खंडकाव्य), हम विषपायी जनम के (1964 ई.)।
सं. : प्रताप (1931 ई.), प्रभा (1921-1923 ई.)
काव्य-पंक्तियां :
कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए।
एक हिलोर इधर से आए एक हिलोर उधर से आए। (विप्लव गान, हम विषपायी जनम के)
आज खडेग की धार कुंठिता है, ख़ाली तूणीर हुआ
विजय पताका झुकी हुई है, लक्ष्य भ्रष्ट यह तीर हुआ। (कुंकुम)
है बलिवेदी, सखे, प्रज्वलित मांग रही ईंधन क्षण-क्षण,
आओ युवक, तुम लगा दो अपने यौवन का ईंधन,
भस्मसात हो जाने दो ये प्रबल उमंगें जीवन की,
अरे सुलगने दो बलिवेदी, चढ़ने दो बलि यौवन की। (हम विषपायी जनम के)
स्वार्गादपि गरीयसी प्यारी, जन्मभूमि का पल्ला
खींचा है दुष्टों ने, बोला है स्वदेश पर हल्ला
कौन हृदय है जो कि न उबले निज समाज की क्षति में ?
कौन आँख है देख सके जो माँ को इस दुर्गति में ? (उर्मिला)
पर चलने के पूर्व यहाँ से कर ले तू वंदन अभिराम
इस सरयू सरिता का, जिस बालू में खेले राम। (उर्मिला)
मैं ही भारत के भविष्य का मूर्तिमन्त विश्वास महान।

हम विषपायी जनम के सहे सुबोल कुबोल।

कोटि-कोटि कंठों से निकली आज यही स्वर धारा है
भारतवर्ष हमारा यह, हिंदुस्तान हमारा है।

मैं देवदूत, मैं अग्निदूत, मैं मनःपूत चिर बलिदानी।

जगजीवन का उन्नायक मैं, अंगारों की मेरी वाणी।

साहित्यिक-सामाजिक सेवाओं के लिए 1960 ई. में पद्मभूषण की उपाधि प्रदान की गई।
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गुरुवार, 30 जनवरी 2020

भाषा और साहित्य प्रश्नोत्तरी (आचार्य रामचंद्र शुक्ल पर विशेष)-1

प्रश्नोत्तरी-12 (भाषा और साहित्य, आचार्य रामचंद्र शुक्ल पर विशेष)

1. #“शुक्लजी स्वच्छंद चिंतक थे। उन्होंने भारतीय परंपरा को मानते हुए  भी अंधानुकरण कहीं नहीं किया है। आधुनिक पश्चिमी शास्त्रमीमांसा को विदेशी कहकर त्यागा भी नहीं है। यथास्थान उसका संग्रह भी (किया) है।” 
उपर्युक्त कथन किसका है?
(1) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (2) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (3) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र (4) रामविलास शर्मा
2. #‘चिंतामणि’ किसका निबंध संग्रह है?
(1) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (2) हजारीप्रसाद द्विवेदी (3) रामविलास शर्मा (4) आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
3. 'साहित्य क्या है' शीर्षक निबंध के रचनाकार हैं:
(1) बालकृष्ण भट्ट (2) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (3) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (4) विवेकीराय
4. 'कविता क्या है?' निबंध के रचनाकार हैं :
(1) बद्रीनाथ भट्ट (2) अनूप शर्मा (3) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (4) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
5. अंग्रेजी के निबंधकार जोसेफ एडिसन के निबंध 'प्लेजर्स आफ इमेजीनेशन' का 'कल्पना का आनंद' शीर्षक से स्वच्छंद भाषांतर किसने किया था?
(1) राहुल सांकृत्यायन (2) बालकृष्ण भट्ट (3) बालमुकुन्द (4) रामचंद्र शुक्ल
6. 'रसात्मकता बोध के विविध रूप' शीर्षक निबंध के रचनाकार हैं :
(1) बालमुकुन्द (2) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (3) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (4) रामविलास शर्मा
7. साहित्य को 'कल्पना और विचार की भाषा' किसने कहा है :
(1) बालकृष्ण भट्ट (2) गुलाबराय (3) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (4) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
8. ''साहित्य के अंतर्गत वह सारा वाङ्मय लिया जा सकता है जिसमें अर्थबोध के अतिरिक्त भावोन्मेष या चमत्कारपूर्ण अनुरंजन हो तथा जिसमें ऐसे वाङ्मय की विचारात्मक व्याख्या हो ।''
उपर्युक्त कथन किसका है?
(1) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (2) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (3) निराला (4) रामविलास शर्मा
9. ''जो उक्ति हृदय में कोई भाव जाग्रत कर दे या उसे प्रस्तुत वस्तु या तथ्य की मार्मिक व्यंजना में लीन कर दे वह तो है काव्य। ''
उपर्युक्त कथन किसका है?
(1) बालमुकुन्द गुप्त (2) बालकृष्ण भट्ट (3) चंद्रधरशशर्मा गुलेरी (4) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
10. '' वाणी का वह चमत्कारपूर्ण विन्यास जो हमारे मन में भावनाओं को तरंगायित कर देता है, काव्य है। ''
उपर्युक्त कथन किस साहित्येतिहासकार का है?
(1) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (2) आचार्य रामचंद्र शुक्ल (3) रामकुमार वर्मा (4) रामविलास शर्मा

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रविवार, 26 जनवरी 2020

अध्यापक सरदारपूर्ण सिंह के निबंध/essays of Adhyapak Sardar Purnasingh

अध्यापक सरदारपूर्ण सिंह के निबंध/essays of Adhyapak Sardar Purnasingh

#सरदार पूर्ण सिंह ने हिंदी में बहुत कम लिखा है। उनके अब तक कुल 6 निबंध प्राप्त हुए हैं। सच्ची वीरता (1909 ई.), कन्यादान (1909 ई.), पवित्रता (1910 ई.), आचरण की सभ्यता (1912 ई.), मज़दूरी और प्रेम (1912 ई.) तथा अमेरिका का मस्त योगी वाल्टह्वीटमैन (1983 ई.)। सातवां निबंध ‘धन की परिभाषा’ अप्राप् है। माधवसिंह भंडारी ‘पार्वती’ के अनुसार इसका प्रकाशन लाहौर की किसी अव्यवसायिक पत्रिका में हुआ था। (अध्यापक पूर्णसिंह निबंधावली, सं. रामअवध शास्त्री, ऋषि पब्लिकेशन, नई दिल्ली, संस्करण 1999 से साभार)

सोमवार, 30 दिसंबर 2019

#शिवदान सिंह चौहान की #रचनाएं/The Works of Shivdaan Singh Chauhan

#शिवदान सिंह चौहान की #रचनाएं/The Works of Shivdaan Singh Chauhan 

(15 मई 1918 ई. - अगस्त 2000 ई.), बमानी, सेमरा, आगरा (उत्तर प्रदेश)
(1) रक्त रंजित स्पेन (स्पेन के गृहयुद्ध पर, 1938 ई.), (2) प्रगतिवाद (1946 ई.), (3) साहित्य की परख (1948 ई.),  (4) कश्मीर : देश और संस्कृति (1949 ई.), (5) हिंदी गद्य साहित्य (1952 ई.),  (6) हिंदी साहित्य के 80 वर्ष (1954 ई.),  (7) साहित्यानुशीलन (1955 ई.), (8) आलोचना के मान (1958 ई.), (9) साहित्य की समस्याएँ (1958 ई.),  (9) आलोचना के सिद्धान्त (1960 ई.), (10) आधुनिक संस्कृति के निर्माता (11) बाबा पृथ्वीसिंह आज़ाद  (12) परिप्रेक्ष्य को सही करते हुए (1999 ई.)। 

#हिंदी भाषा में प्रयुक्त विदेशज या विदेशी शब्द

#हिंदी भाषा में प्रयुक्त विदेशज या विदेशी शब्द


हिंदी भाषा में प्रयुक्त होने वाले विदेशी शब्दों को विदेशज या विदेशी शब्द कहते हैं। ये शब्द हिंदी में फ़ारसी, अरबी, तुर्की, पश्तो, पुर्तगाली, चीनी, अंग्रेज़ी, इत्यादि से आए हैं।
आधुनिक आर्य भाषा का विकास 11 वीं शताब्दी से शुरू होता है और उसी समय से शासन-प्रशासन, धर्म-संस्कृति से संबंधित है कतिपय विदेशी शब्द हिंदी भाषा में शामिल होने शुरू हो गए और यह प्रकिया आज तक जारी है और  भविष्य में भी जारी रहेगी। आदान-प्रदान और बदलाव एक सतत् प्रक्रिया है, जिसमें पुराने शब्द अतीत के गर्भ में समाते और नए शब्द जन्म लेते रहते और घुलते-मिलते रहते हैं।
हिंदी में प्रयुक्त एशियाई शब्द
फ़ारसी, अरबी, तुर्की, पश्तो, जापानी शब्द, चीनी शब्द।
हिंदी में प्रयुक्त यूरोपीय शब्द
अंग्रेज़ी, पुर्तगाली, रूसी, फ्रांसीसी, डच, जर्मन, इतालवी शब्द।
विस्तार के लिए देखें