रविवार, 4 जुलाई 2021

प्रश्नोत्तरी-31 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, लालचदास)

 प्रश्नोत्तरी-31 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, लालचदास)

# लालचदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) इन्होंने संवत् 1585 में 'हरिचरित' और संवत् 1587 में 'भागवत दशम स्कंध भाषा' नाम की पुस्तक अवधी मिली भाषा में बनाई और दोहे चौपाइयों में लिखी गई हैं।

(B) इनकी लिखी एक 'बावनी' भी है जिसमें 52 दोहे हैं।

(C) लालचदास की पुस्तक 'दशम स्कंध भाषा' का अनुवाद फ़ारसी भाषा में हुआ है।

(D) ‘‘सकल संत कहँ नावौं माथा । बलि बलि जैहौं जादवनाथा।।

रायबरेली बरनि अवासा । लालच रामनाम कै आसा।।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार लालचदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)

 प्रश्नोत्तरी-30 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, छीहल)

#छीहल के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) ये श्री हितहरिवंश जी के शिष्य स्वप्न में हुए थे।

(B) संवत् 1575 में छीहल ने 'पंचसहेली' नाम की पुस्तक दोहों में राजस्थानी मिली भाषा में बनाई। इनकी लिखी एक 'बावनी' भी है जिसमें 52 दोहे हैं।

(C) 'पंचसहेली' में पाँच सखियों की विरह वेदना का वर्णन है।

(D) ‘‘देख्या नगर सुहावना, अधिक सुचंगा थानु।

नाउँ चँदेरी परगटा, जनु सुरलोक समानु।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार छीहल हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (B)(b)(c)(d)

 

#ध्रुवदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A)   नाभा जी के भक्तमाल के अनुकरण पर इन्होंने 'भक्तनामावली' लिखी है जिसमें अपने समय तक के भक्तों का उल्लेख किया है।

(B)   ये प्रेममार्गी शाखा के कवि हैं।

(C)     सभामंडली (संवत् 1681), वृंदावनसत ( संवत् 1686) और रसमंजरी (संवत् 1698) ध्रुवदास की रचनाएं हैं।

(D)   ‘‘प्रेम बात कछु कहि नहिं जाई । उलटी चाल तहाँ सब भाई।।

प्रेम बात सुनि बौरो होई। तहाँ सयान रहै नहिं कोई।।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार ध्रुवदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

#‘‘ये कृष्णभक्त कवि हमारे साहित्य में प्रेममाधुर्य का जो सुध स्रोत बहा गए हैं, उसके प्रभाव से हमारे काव्यक्षेत्र में सरसता और प्रफुल्लता बराबर बनी रहेगी। 'दु:खवाद' की छाया आ आकर भी टिकने न पाएगी। इन भक्तों का हमारे साहित्य पर बड़ा भारी उपकार है।’’ यह कथन किसका है?

(A) श्यामसुंदरदास

(B) हज़ारीप्रसाद

(C) विद्यानिवास मिश्र

(D) रामचंद्र शुक्ल

Ans. : (D) रामचंद्र शुक्ल

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)

शनिवार, 3 जुलाई 2021

प्रश्नोत्तरी-29 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, भक्तिकाल की फुटकल रचनाएँ /Bhaktikaal ki Futkal Rachnayen)

 

प्रश्नोत्तरी-29 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, भक्तिकाल की फुटकल रचनाएँ /Bhaktikaal ki Futkal Rachnayen)

# निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) कवियों के सम्मान के साथ साथ कविता का सम्मान भी यहाँ तक बढ़ा कि अब्दुर्रहीम खानखाना ऐसे उच्चपदस्थ सरदार क्या बादशाह तक ब्रजभाषा की ऐसी कविता करने लगे।

(B) भक्तिकाल में प्रबंध काव्य नहीं लिखे गए।

 

(C) नरहरि और गंग ऐसे सुकवि और तानसेन ऐसे गायक अकबरी दरबार की शोभा बढ़ाते थे।

(D) ‘‘जाको जस है जगत में, जगत सराहै जाहि।

ताको जीवन सफल है, कहत अकब्बर साहि।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार बादशाह अकबर हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

# निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A)   अनेक अच्छे आख्यान काव्य भी भक्तिकाल में लिखे गए।

(B)   हृदयराम भाषा हनुमन्नाटक और सुप्रसिद्ध कृष्णभक्त कवि व्यास जी (संवत् 1620 के आसपास) के देव नामक एक शिष्य 'देवमायाप्रपंचनाटक' के लेखक हैं।

(C)   ‘‘अकबर के राजत्वकाल में एक ओर तो साहित्य की चली आती हुई परंपरा को प्रोत्साहन मिला, दूसरी ओर भक्त कवियों की दिव्यवाणी का स्रोत उमड़ चला। इन दोनों की सम्मिलित विभूति से अकबर का राजत्वकाल जगमगा उठा और साहित्य के इतिहास में उसका एक विशेष स्थान हुआ।’’ यह कथन रामचंद्र शुक्ल का है।

(D)   ‘‘प्रेम बात कछु कहि नहिं जाई । उलटी चाल तहाँ सब भाई।।

प्रेम बात सुनि बौरो होई। तहाँ सयान रहै नहिं कोई।।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार तुलसीदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (A)(a)(b)(c)

#‘‘जिस काल में सूर और तुलसी ऐसे भक्त के अवतार तथा नरहरि, गंग और रहीम ऐसे निपुण भावुक कवि दिखाई पड़े उसके साहित्यिक गौरव की ओर ध्यान जाना स्वाभाविक ही है।’’ भक्तिकाल के संबंध में यह कथन किसका है?

(A) श्यामसुंदरदास

(B) हज़ारीप्रसाद

(C) विद्यानिवास मिश्र

(D) रामचंद्र शुक्ल

Ans. : (D) रामचंद्र शुक्ल

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 6 : भक्तिकाल की फुटकल रचनाएं)

शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

प्रश्नोत्तरी-28 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, ध्रुवदास)

 प्रश्नोत्तरी-28 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, ध्रुवदास)

#ध्रुवदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) ये श्री हितहरिवंश जी के शिष्य स्वप्न में हुए थे।

(B) इन्होंने पदों के अतिरिक्त दोहे, चौपाई, कवित्त, सवैये आदि अनेक छंदों में भक्ति और प्रेमतत्व का वर्णन किया है।

(C) ये रामाश्रयी शाखा के कवि थे।

(D) ‘‘रूपजल उठत तरंग हैं कटाछन के,

अंग अंग भौंरन की अति गहराई है।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार ध्रुवदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

 

#ध्रुवदास के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A)   नाभा जी के भक्तमाल के अनुकरण पर इन्होंने 'भक्तनामावली' लिखी है जिसमें अपने समय तक के भक्तों का उल्लेख किया है।

(B)   ये प्रेममार्गी शाखा के कवि हैं।

(C)    सभामंडली (संवत् 1681), वृंदावनसत ( संवत् 1686) और रसमंजरी (संवत् 1698) ध्रुवदास की रचनाएं हैं।

(D)   ‘‘प्रेम बात कछु कहि नहिं जाई । उलटी चाल तहाँ सब भाई।।

प्रेम बात सुनि बौरो होई। तहाँ सयान रहै नहिं कोई।।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार ध्रुवदास हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

#‘‘ये कृष्णभक्त कवि हमारे साहित्य में प्रेममाधुर्य का जो सुध स्रोत बहा गए हैं, उसके प्रभाव से हमारे काव्यक्षेत्र में सरसता और प्रफुल्लता बराबर बनी रहेगी। 'दु:खवाद' की छाया आ आकर भी टिकने न पाएगी। इन भक्तों का हमारे साहित्य पर बड़ा भारी उपकार है।’’ यह कथन किसका है?

(A) श्यामसुंदरदास

(B) हज़ारीप्रसाद

(C) विद्यानिवास मिश्र

(D) रामचंद्र शुक्ल

Ans. : (D) रामचंद्र शुक्ल

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)

प्रश्नोत्तरी-27 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, रसख़ान)

 प्रश्नोत्तरी-27 (हिंदी भाषा एवं साहित्य, रसख़ान)

#रसख़ान के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) ये बड़े प्रेमी जीव थे। वही प्रेम अत्यंत गूढ़ भगवद्भक्ति में परिणत हुआ।

(B) प्रेम को रसख़ान ने शरीर व्यवहार से अलग 'अतन' अर्थात् मानसिक या आध्यात्मिक वस्तु कहा है।

(C) इनकी भाषा बहुत चलती सरल और शब्दाडंबरमुक्त होती थी।

(D) ‘‘मानुष हों तो वही रसखान बसौं सँग गोकुल गाँव के ग्वारन।

जौ पसु हों तो कहा बसु मेरो चरौं नित नंद की धोनु मझारन।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार रसख़ान हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

#रसख़ान के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) रसख़ान गोसाईं वल्लभाचार्य के शिष्य थे।

(B) इनकी दो छोटी छोटी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं ‘प्रेमवाटिका’ (दोहे) और ‘सुजान रसखान’ (कवित्त सवैया)।

(C) इनकी कृति परिमाण में तो बहुत अधिक नहीं हैं पर जो है वह प्रेमियों के मर्म को स्पर्श करनेवाली है।

(D) ‘‘मोर पखा सिर ऊपर राखिहौ, गुंज की माल गले पहिरौंगी।

ओढ़ि पितांबर लै लकुटी बन गोधन ग्वालन संग फिरौंगी।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार रसख़ान हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (B)(b)(c)(d)

 

#रसख़ान के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) ये बड़े भारी कृष्णभक्त और गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के बड़े कृपापात्र शिष्य थे।

(B) भगवान प्रेम के वशीभूत हैं, जहाँ प्रेम है वहीं प्रिय है।

(C) रसख़ान मलूकदास के शिष्य थे।

(D) ‘‘सेस महेस गनेस दिनेस सुरेसहु जाहिं निरंतर गावैं।

जाहि अनादि अनंत अखंड अछेद अभेद सुवेद बतावैं।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार रसख़ान हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (D)(a)(b)(d)

 

#रसख़ान के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) कृष्णभक्तों के समान इन्होंने 'गीतकाव्य' का आश्रय न लेकर कवित्त सवैयों में अपने सच्चे प्रेम की व्यंजना की है।

(B) ये श्री हितहरिवंश जी के शिष्य स्वप्न में हुए थे।

(C) रसख़ान की रचना प्रेमियों के मर्म को स्पर्श करनेवाली है।

(D) या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।

आठहु सिद्धि नवौ निधि के सुख नंद की गाय चराय बिसारौं। इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार रसख़ान हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

#रसख़ान के संबंध में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन सत्य हैं :

(A) अनुप्रास की सुंदर छटा होते हुए भी भाषा की चुस्ती और सफाई कहीं नहीं जाने पाई है। बीच बीच में भावों की बड़ी सुंदर व्यंजना है।

(B) रसख़ान सूरदास के शिष्य थे।

(C) लीलापक्ष को लेकर इन्होंने बड़ी रंजनकारिणी रचनाएँ की हैं।

(D)‘‘ब्रह्म मैं ढँढयो पुरानन गानन, वेदरिचा सुनी चौगुने चायन।

देख्यो सुन्यो कबहूँ न कहूँ वह कैसे सरूप और कैसे सुभायन।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार रसख़ान हैं।

(A)(a)(b)(c)

(B)(b)(c)(d)

(C)(a)(c)(d)

(D)(a)(b)(d)

Ans. : (C)(a)(c)(d)

 

#‘‘जेहि बिनु जाने कछुहि नहिं जान्यों जात बिसेस।

सोइ प्रेम जेहि जान कै रहि न जात कछु सेस।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(A) हरीराम व्यास

(B) रसख़ान

(C) सूरदास

(D) रसख़ान

Ans. : (D) रसख़ान

 

#‘‘प्रेमफाँस सो फँसि मरै सोई जियै सदाहि।

प्रेम मरम जाने बिना मरि कोउ जीवत नाहिं।’’ इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :

(A) हरीराम व्यास

(B) रसख़ान

(C) सूरदास

(D) गदाधर भट्ट

Ans. : (B) रसख़ान

 

#“प्रेम के ऐसे सुंदर उद्गार इनके सवैयों में निकले कि जनसाधरण प्रेम या श्रृंगार संबंधी कवित्त सवैयों को ही 'रसखान' कहने लगे। जैसे 'कोई रसखान सुनाओ।'” यह कथन किसका है?

(A) रामचंद्र शुक्ल

(B) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी

(C) विद्यानिवास मिश्र

(D) रसख़ान

Ans. : (A) रामचंद्र शुक्ल

 

# “शुद्ध ब्रजभाषा का जो चलतापन और सफाई इनकी और घनानंद की रचनाओं में है वह अन्यत्रा दुर्लभ है। यह कथन किसका और किसके संबंध में है?

(A) श्यामसुंदरदास का सूरदास के संबंध में

(B) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का कबीरदास के संबंध में

(C) विद्यानिवास मिश्र का रहीम के संबंध में

(D) रामचंद्र शुक्ल का रसख़ान के संबंध में

Ans. : (D) रामचंद्र शुक्ल का रसख़ान के संबंध में

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हिंदी साहित्य का इतिहास, भक्तिकाल : प्रकरण 5—सगुणधारा : कृष्णभक्ति शाखा)