रविवार, 30 जनवरी 2022

Syllabus B. A. Part-III (BNMU/Purnea University) हिंदी (सामान्य) (भाषा-साहित्य का इतिहास, काव्यांग विवेचन एवं प्रयोजनमूलक हिंदी)

 Syllabus B. A. Part-III (BNMU/Purnea University)
हिंदी (सामान्य) (भाषा-साहित्य का इतिहास, काव्यांग विवेचन एवं प्रयोजनमूलक हिंदी) 

समय : 3 घंटे  

पूर्णांक : 100 

यह पत्र पांच खंडों में विभक्त है। खंड (क)  हिंदी भाषा के इतिहास से, खंड (ख) हिंदी साहित्य के इतिहास से, खंड (ग) काव्यांग के विवेचन से और खंड (घ) प्रयोजनमूलक हिंदी से संबद्ध है। परीक्षार्थियों को इनमें से प्रत्येक से एक-एक अर्थात कुल चार आलोचनात्मक प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। खंड (ड.) और खंड (ड.) वस्तुनिष्ठ/अतिलघुउत्तरीय प्रश्नों के होंगे जिनके भी उत्तर अपेक्षित होंगे। 

अंक विभाजन : 

 (i) निर्धारित पाठ्य विषयों से आलोचनात्मक प्रश्न :  4×20=80 अंक

(प्रत्येक खंड से एक-एक)

🙏(ii) वस्तुनिष्ठ/अतिलघूत्तरीय प्रश्न : 20×1=20 अंक

निर्धारित पाठ्य विषय :

खंड (क) हिंदी भाषा का इतिहास

अध्येतव्य : हिंदी भाषा का स्वरूप विकास, मूल आकार भाषाएं तथा विभाषाओं का विकास।

खंड (ख) हिंदी साहित्य का इतिहास

अध्येतव्य : हिंदी साहित्य के आदिकाल, पूर्वमध्यकाल, उत्तरमध्य काल तथा आधुनिक काल की सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि,श प्रमुख युगप्रवृतियां, विशिष्ट रचनाकार और उनकी प्रतिनिधि कृतियां।

खंड (ग) काव्यांग विवेचन

अध्येतव्य : काव्य का स्वरूप, काव्य हेतु, काव्यप्रयोजन, रसांग विवेचन, रस निष्पत्ति।

 निम्नलिखित अलंकारों के लक्षण-उदाहरण, यमक, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, भ्रांतिमान, श्लेष, असंगति, विरोधाभास, अतिशयोक्ति,

 विभावना।

निम्नलिखित छंदों के लक्षण-उदाहरण दोहा, चौपाई, रोला, सोरठा, कवित्त, छप्पय, कुंडलिया, सवैया, वसंतिलका, मंदाक्रांता।

खंड (घ) प्रयोजनमूलक हिंदी

अध्येतव्य : संक्षेपण, पल्लवन, प्रारूपण, टिप्पण, कार्यालयी एवं व्यवसायिक पत्र।

ध्यातव्य : इस पत्र के लघुउत्तरीय प्रश्न उपर्युक्त निर्धारित पाठ्य विषय पर आधृत होंगे।

अनुशंसित सहायक पुस्तकें : 

1. हिंदी भाषा का उद्भव और विकास : डॉ. उदय नारायण तिवारी (भारती भंडार, इलाहाबाद) 

2. हिंदी भाषा का इतिहास : डॉ. भोलानाथ तिवारी (वाणी प्रकाशन, दिल्ली) 

3. हिंदी भाषा का विकास : डॉ. गोपाल राय (अनुपम प्रकाशन, पटना)

4. हिंदी साहित्य का इतिहास : डॉ. नगेंद्र 

5. हिंदी साहित्य का इतिहास : आचार्य रामचंद्र शुक्ल 

6. रीतिकाल की भूमिका : डॉ. नगेंद्र 

7. आधुनिक हिंदी साहित्य : डॉ. लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय

8. काव्य दर्पण : पंडित रामहिन मिश्र 

9. रसमंजरी : सं. कन्हैयालाल पोद्दार 

10. रस-प्रक्रिया और बोध : डॉ. रूद्र प्रताप सिंह 

11. अलंकार मुक्तावली : आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा 

12. छंदशास्त्र : पंडित रघुनंदन शास्त्री 

13. प्रयोजनमूलक हिंदी : विनोद गोदरे (वाणी प्रकाशन, दिल्ली) 

14. हिंदी राष्ट्रभाषा, राजभाषा एवं संपर्क भाषा : डॉ. मदन कुमार (मोतीलाल बनारसीदास, पटना) 

15. काव्य कल्पद्रुम : कन्हैयालाल पोद्दार

 16. प्रयोजनमूलक हिंदी : पारिभाषिक शब्दावली तथा टिप्पण प्रारूपण : डॉ. मधु धवन

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